श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1345, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ेंतेरहवाँ अध्याय 13/29-39 ] सर्वप्रथम गुरुवर्गोंका सम्मान :- परमानन्द पुरी, आर भारती ब्रह्मानन्द। श्रीहस्ते चन्दन पाञा बाड़िल आनन्द॥ 30 ॥ अद्वैत-आचार्य, आर प्रभु-नित्यानन्द। श्रीहस्त-स्पर्शे दुँहार हइल आनन्द॥ 31 ॥ प्रधान कीर्तनीया श्रीस्वरूप और श्रीवासका समादर :- कीर्त्तनीयागणे दिल माल्य-चन्दन। स्वरूप, श्रीवास, -याँहा मुख्य दुइजन ॥ 32 ॥ अनुवाद-जब रथ रुका हुआ था, तब महाप्रभुने सभी भक्तोंको एकत्रित करके अपने श्रीहस्तसे माला पहनायी और उन्हें चन्दन लगाया। महाप्रभुके श्रीहस्तसे माला-चन्दन प्राप्त करके श्रीपरमानन्द पुरी और श्रीब्रह्मानन्द भारतीका आनन्द बहुत अधिक बढ़ गया। श्रीअद्वैताचार्य और श्रीनित्यानन्द प्रभु भी महाप्रभुके श्रीहस्तका स्पर्श पाकर बहुत आनन्दित हुए। महाप्रभुने सभी कीर्तन करनेवालोंको भी माला-चन्दन प्रदान किये। उनमें श्रीस्वरूप दामोदर और श्रीवास पण्डित मुख्य कीर्तनीया थे॥ 29-32 ॥ मृदङ्गवादक और गायकोंकी चार कीर्तन-मण्डलियाँ :- चारि सम्प्रदाये हैल चब्बिश गायन। दुइ दुइ मृदङ्ग करि' हैल अष्टजन ॥ 33 ॥ महाप्रभुके द्वारा कीर्तन-मण्डलीका विभाग :- तबे महाप्रभु मने विचार करिया। चारि सम्प्रदाय दिल गायन बाँटिया ॥ 34 ॥ अनुवाद-कीर्तन करनेवाली चार मण्डलियोंमें चौबीस गायक थे। प्रत्येक मण्डलीमें दो-दो मृदङ्ग बजानेवाले थे अर्थात् आठ लोग थे। तब महाप्रभुने मनमें विचार करके चौबीस गायकोंको चार मण्डलियोंमें बाँट दिया। इस प्रकार प्रत्येक मण्डलीमें छह-छह गायक और दो-दो मृदङ्ग बजानेवाले थे॥ 33-34 ॥ चार मण्डलियोंमें चार नर्तक :- नित्यानन्द, अद्वैत, हरिदास, वक्रेश्वरे। चारिजने आज्ञा दिल नृत्य करिबारे ॥ 35 ॥ अनुवाद-महाप्रभुने श्रीनित्यानन्द प्रभु, श्रीअद्वैताचार्य, श्रीहरिदास ठाकुर और श्रीवक्रेश्वर पण्डितको एक-एक मण्डलीमें नृत्य करनेका आदेश दिया॥ 35 ॥ प्रथम मण्डलीमें श्रीस्वरूपही मूल गायक :- प्रथम-सम्प्रदाये कैल स्वरूप-प्रधान। आर पञ्चजन दिल ताँर पालिगान ॥ 36 ॥ श्रीस्वरूपके साथ पाँच भक्त उनके पीछे गानेवाले :- दामोदर, नारायण, दत्त गोविन्द। राघव पण्डित, आर श्रीगोविन्दानन्द ॥ 37 ॥ अनुवाद-प्रथम मण्डलीमें श्रीस्वरूप दामोदरको प्रधान कीर्तनीया बनाया और उन्हें पाँच लोग - श्रीदामोदर पण्डित, श्रीनारायण, श्रीगोविन्द दत्त, श्रीराघव पण्डित और श्रीगोविन्दानन्द, उनके पीछे गानेके लिये दिये॥ 36-37 ॥ अमृतप्रवाह भाष्य - 'पालिगान' - दोहराना ॥ 36 ॥ और श्रीअद्वैत ही नर्तक; दूसरी मण्डलीमें श्रीवास मूल गायक :- अद्वैतेरे नृत्य करिबारे आज्ञा दिल। श्रीवास-प्रधान आर सम्प्रदाय कैल ॥ 38 ॥ पाँच लोग पीछे गानेवाले, श्रीनिताइ-नर्तक :- गङ्गादास, हरिदास, श्रीमान्, शुभानन्द। श्रीराम पण्डित, ताँहा नाचे नित्यानन्द ॥ 39 ॥ अनुवाद-महाप्रभुने श्रीअद्वैताचार्यको श्रीस्वरूप दामोदरकी मण्डलीमें नृत्य करनेका आदेश दिया और श्रीवास पण्डितको दूसरी मण्डलीका प्रधान कीर्तनीया नियुक्त किया। दूसरी मण्डलीमें श्रीवास पण्डितके पीछे गानेवाले श्रीगङ्गादास, श्रीहरिदास, श्रीमान्, श्रीशुभानन्द और श्रीराम पण्डित थे। उस मण्डलीमें नृत्य करनेवाले श्रीनित्यानन्द प्रभु थे॥ 38-39 ॥ । 501