श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ 14/255-257 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत मध्यलीला इति श्रीचैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे 'हेरापञ्चमी'- करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका वर्णन यात्रा-दर्शनं नाम चतुर्द्दश-परिच्छेदः। कर रहा है॥255-257॥ अनुवाद—इस प्रकार महाप्रभुने भक्तोंको श्रीजगन्नाथ श्रीचैतन्यचरितामृतके मध्यखण्डमें 'हेरा-पञ्चमी'-यात्रा-दर्शन रथ-यात्राका दर्शन करवाया और भक्तोंको लेकर नामक चौदहवें अध्यायका अनुवाद समाप्त। वृन्दावनकी लीलाएँ करके उनका आस्वादन किया। अनुभाष्य—आदिलीला 10/162-163 और 17/231 श्रीचैतन्य गोसाईंकी लीलाएँ अनन्त, अपार हैं, हजार संख्या देखें॥ 256॥ मुखवाले शेष भी उन लीलाओंका पार नहीं पा सकते। चौदहवें अध्यायका अनुभाष्य समाप्त। श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी कृपाभिलाषा मध्यलीलाका प्रथम भाग समाप्त। 562 ।