भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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पृष्ठ 1821

बाइसवाँ अध्याय 22/164-165 ] साधनभक्तिके श्रवणसे श्रीकृष्णप्रेमका उदय :- इति श्रीचैतन्यचरितामृते मध्यखण्डे अभिधेय- अभिधेय साधनभक्ति सुने येइ जन। भक्तितत्त्वविचारो नाम द्वाविंशः परिच्छेदः। अचिरात् पाय सेइ कृष्णप्रेमधन॥ 164॥ अनुवाद-श्रीरूप-रघुनाथ गोस्वामीके चरणकमलोंकी अनुवाद-जो भी व्यक्ति इस अभिधेय साधनभक्तिके कृपाभिलाषा करते हुए कृष्णदास इस श्रीचैतन्यचरितामृतका विषयमें सुनता है, उसे अतिशीघ्र श्रीकृष्णप्रेमधनकी वर्णन कर रहा है॥ 165 ॥ प्राप्ति होती है॥ 164॥ श्रीरूप-रघुनाथ-पदे यार आश। श्रीचैतन्यचरितामृतके मध्यखण्डमें अभिधेयभक्तितत्त्वविचार- चैतन्यचरितामृत कहे कृष्णदास॥ 165 ॥ नामक बाइसवें अध्यायका अनुवाद समाप्त। । 375