श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1978, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ काण-कृष्ण श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत मध्यलीला काणेर भितर वासा करे 21/144 | कुविषय-कूपे पड़ि' 20/99 | कृष्ण ताँरे शुद्ध करे 22/139 काँथा-करङ्गिया मोर 25/176 | 'कुर्व्वन्ति'-पद-एइ 24/25 | कृष्ण-तुल्य भागवत 24/312 कान्तभावे निजाङ्ग दिया 19/231 | कुलीनग्रामीरे कहे सम्मान 15/98 | कृष्णतुल्य भागवत 25/259 कान्तागणेर रति पाय 24/34 | कृपा करि' तँहो मोर 17/167 | 'कृष्ण, तोमार हड' यदि 22/33 कान्धे चड़े, कान्धे चड़ाय 19/222 | कृपा करि' यदि मोरे 20/101 | कृष्णदास कहे,-"मुञ्जि 18/85 काम-क्रोधेर दास हञा 22/14 | कृपा करि' सब तत्त्व 20/103 | "कृष्ण देखि आइला?" 18/103 कामगायत्री-मन्त्ररूप, हय 21/125 | कृपार समुद्र कृष्ण गम्भीर 20/63 | कृष्ण-'ध्यान' करे लोक 20/333 काम छाड़ि 'दास' हैते 22/41 | कृपालु, अकृतद्रोह, सत्यसार 22/75 | कृष्ण नव-जलधर 21/109 काम-त्यजि' कृष्ण भजे 22/136 | कृष्ण अंशी, तँहो अंश 20/315 | 'कृष्णनाम', 'कृष्णगुण' 17/135 कामधेनु-कोटि-पतिर 15/179 | कृष्ण आमि नाहि 20/64 | 'कृष्णनाम', 'कृष्ण स्वरूप' 17/130 काम लागि' कृष्णे भजे 22/41 | कृष्णकथा, कृष्णनाम 19/129 | कृष्णनाम दिया कैल 17/46 कामादि 'दुःसङ्ग' छाड़ि 24/92 | 'कृष्ण' कह, 'कृष्ण' कह 18/206 | कृष्णनाम निरन्तर याँहार 16/72 कायव्यूह हैले नारदेर 20/169 | 'कृष्ण' कह बलि' प्रभु 17/31 | 'कृष्णनाम-सङ्कीर्त्तन'-कलि 20/337 कारो मन कोन गुणे 24/43 | 'कृष्ण' कहि' व्याघ्र-मृग 17/40 | कृष्णनाम, सेइ पूज्य 15/106 कार्यद्वारा ज्ञान,-एइ 20/355 | कृष्ण कहे,-"आमा भजे 22/38 | 'कृष्ण-नित्यदास'-जीव 22/24 कालवस्त्र परे सेइ 18/185 | कृष्ण कहे,-"एइ ब्रह्माण्ड 21/84 | कृष्णनिष्ठा, तृष्णा-त्याग 19/214 कालीयदहे मत्स्य मारे 18/104 | कृष्ण-कृपा तोमाते 20/104 | 'कृष्णपदार्त्चन' हय द्वापरेरे 20/334 कालीय-शिरे नृत्य करे 18/94 | कृष्णकृपा बिना कोन 17/75 | 'कृष्ण-पारिषद' नाम 22/11 कालीयेर शरीरे कृष्ण 18/105 | कृष्णकृपाय अज्ञ पाय 19/235 | 'कृष्ण'-प्राप्य-सम्बन्ध 20/124 काशीते आमि आइलाङ 25/161 | कृष्णकृपा याँरे, ताँरे के 16/241 | कृष्णप्रीतये भोगत्याग 22/113 काशीते ग्राहक नाहि 25/162 | कृष्णकृपाय साधुसङ्गे रति 24/182 | कृष्णप्रेम जन्माय एइ 22/126 काँहा मुक्ति पाब, काँहा 25/42 | कृष्ण-कृपालु, आमाय 17/69 | कृष्णप्रेम जन्मे, तँहो 22/80 'काँहारे रावण' प्रभु कहे 15/34 | 'कृष्ण' 'कृष्ण' कह, करि' 17/40 | 'कृष्णप्रेम', 'भक्तिरस' 24/348 काँहा हैते पाइले तुमि 17/165 | 'कृष्ण' 'कृष्ण' कहि' व्याघ्र 17/29 | कृष्णप्रेमा ताँहा, याँहा 17/173 कि काय संन्यासे मोर 15/51 | कृष्ण, कृष्णभक्ति, प्रेम 20/143 | कृष्ण-बड़ दयामय 20/62 किन्तु काहाँ 'कृष्ण' 18/108 | कृष्ण, कृष्णभक्ति बिना 24/94 | 'कृष्ण'-वर्णे कराय लोके 20/334 किन्तु यदि लतार सङ्गे 19/158 | कृष्ण केने दरशन 18/101 | कृष्ण-बहिर्मुख-दोष 24/131 किवा युक्ति कैल दुँहे 15/38 | कृष्णगुणाकृष्ट हञा 24/108 | कृष्ण बिना अन्य-उपासना 15/142 किवा रघुनन्दन-पिता 15/114 | कृष्णगुणाख्याने करे 23/31 | कृष्ण बिना तृष्णा-त्याग 19/213 किम्वा निज-प्राण यदि 15/262 | 'कृष्णचरण'-कल्पवृक्षे 19/154 | कृष्णभक्तगण करे रस 23/94 कुण्डेर 'महिमा'-येन 18/11 | कृष्णतत्त्व, भक्तितत्त्व 25/258 | कृष्णभक्त-दुःखहीन 24/176 कुण्डेर 'माधुरी'-येन 18/11 | कृष्णतत्त्व, भक्तितत्त्व 19/115 | कृष्णभक्त-निष्काम, अतएव 19/149 कुण्डेर मृत्तिका लञा 18/14 | कृष्ण ताँरे करे तत्काले 22/99 | 'कृष्ण-भक्तवश' गुण 19/228 532 ।