श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 1980, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ गाय-ज्वल श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत मध्यलीला गायत्रीर अर्थे एइ 25/140 | चारिजनेर पुनः पृथक् 20/194 | 'जननी' 'जाह्नवी',-एइ 16/90 गुणराज-खाँन कैल 15/99 | चारि पुरुषार्थ छाड़ाय, हरे 24/60 | जन्म-दिनादि-महोत्सव 22/123 गुणाकृष्ट हञा करे निर्मल 24/106 | चारिवर्ण धरि' कृष्ण करेन 20/330 | जन्म हैते शुक-सनकादि 24/108 गुण्डिचाय आसिबे सबाय 15/97 | चारि वर्णाश्रमी यदि 22/26 | जले जलकेलि करे 18/9 गुरु-अन्तर्यामि-रूपे 22/47 | चारिविध ताप तार करे 24/56 | जानि दार्थ्य लागि' पुछे 20/105 गुरु-कृष्ण-प्रसादे पाय 19/151 | चिच्छक्तिविभूति-धाम 21/55 | जालियारे मूढ़-लोक 18/106 गुरुतुल्य श्रीगणेर वात्सल्ये 24/53 | चिच्छक्ति, जीवशक्ति, आर 20/111 | जिज्ञासु, ज्ञानी,-दुइ 24/90 गुरुपादाश्रय, दीक्षा, गुरुर 22/112 | चिच्छक्ति, मायाशक्ति, जीव 20/149 | जिनि' पञ्चशर-दर्प 21/107 गुरु-पाशे सेइ भक्ति 25/120 | चिच्छक्ति-सम्पत्तिर 'षडैश्वर्य' 21/96 | जिह्वा-स्पर्शे आचण्डाले 15/108 'गुरु' हञा शिष्ये' नमस्कार 17/170 | चित्त आकर्षिया कराय 15/109 | जीव, ईश्वर-तत्त्व-कभु 18/113 गृहस्थ विषयी आमि, कि 15/103 | चित्रजल्पेर दश अङ्ग 23/56 | जीवतत्त्व-हय, नहे कृष्णेर 20/308 'गृहस्थ' हयेन इँहो, चाहिये 15/95 | चिदानन्द कृष्णविग्रहे 'मायिक' 25/35 | 'जीव' तुमि एइ तिन 25/104 गोकुले 'केवला' रति 19/193 | चिदानन्द-देह, सर्वाश्रय 20/153 | 'जीवन्मुक्त' अनेक सेइ 24/124 गोपवेश, वेणुकर 21/101 | चैतन्यकथा सुने, करे चैतन्य 19/131 | जीव-रूप 'बीज' ताते 20/273 गोपाल प्रकट करि' सेवा 17/168 | चैतन्य-गोसाञि येइ कहे 25/44 | जीवरूप 'ब्रह्मार' आवेश 20/367 गोपीभाव-दर्पण, नव नव 21/118 | चैतन्य-गोसाञिर निन्दा 15/261 | जीवधर्मे 'कृष्ण'-ज्ञान कभु 18/111 गोवर्धन-उपरे आमि कभु 18/23 | चैतन्य-चरित्र एइ-'अमृतेर 18/228 | जीवे दुःख दितेछ, तोमार 24/243 गोवर्धन-परिक्रमाय करिला 18/32 | 'चैतन्य' 'चैतन्य' करि' 17/126 | जीवे 'विष्णु' बुद्धि करे 25/77 गोविन्दकुण्डादि'-तीर्थे प्रभु 18/35 | 'चैतन्य'-नाम ताँर, भावुक 17/117 | जीवे विष्णु मानि-एइ 25/76 गोविन्देर माधुरी देखि' 20/179 | चैतन्यलीला-अमृतपूर 25/270 | जीवेर दुःख देखि' मोर 15/162 गोलोकाख्य गोकुल, मथुरा 21/91 | चैतन्येर कृपा याँहे, ताँहे 19/132 | जीवेर धर्म-नाम-देह 17/132 गोसाञि कहे,-'ये खण्डिल 20/93 | चौद्द एक दिने, मासे 20/321 | जीवेर पाप लञा मुञि 15/163 गौड़-देशे हय मोर 16/90 | चौराशी-लक्ष योनिते 19/138 | जीवेर स्वभाव-कृष्णे 24/195 गौड़, बङ्ग, उत्कल, दक्षिण 17/52 | छ | जीवेर 'स्वरूप' हय-कृष्णेर 20/108 'गौड़िया' ठक् एइ काँपे 18/172 | छयेर छह मत व्यास 25/52 | जीवेरे कृपाय कैला कृष्ण 20/122 ग्राम्य-व्यवहारे पण्डित, ताइ 20/100 | ज | ज्ञान-वैराग्यादि-भक्तिर 22/141 ग्राहक नाहि, ना बिकाय 17/144 | जङ्गमे तिर्यक्-जल 19/144 | ज्ञानमार्गे उपासक-दुइत' 24/102 च | जगत् भासिल चैतन्यलीलार 17/233 | ज्ञानमार्गे-निर्विशेष-ब्रह्म 24/79 चक्रादि-धारण-भेदे नाम 20/195 | जगन्मङ्गल ताँर 'कृष्णचैतन्य' 17/113 | ज्ञान, योग, भक्ति,-तिन 20/157 चड़ि गोपी-मनोरथे 21/107 | जगल्लक्ष्मी राखे, याँहा 21/53 | ज्ञानशक्ति-प्रधान वासुदेव 20/253 चण्डाल-पवित्र, याँर 16/184 | जड़रूपा प्रकृति नहे 20/259 | ज्ञानी जीवन्मुक्तदशा 22/29 चतुरालि छाड़ सनातन 20/364 | जड़ हैते सृष्टि नहे ईश्वर 20/260 | ज्योतिश्चक्रे सूर्य येन 20/385 चतुर्भुज हैले, नाम 20/176 | | ज्वलदग्निराशि यैछे 18/113 534 ।