भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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526 श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत अन्त्यलीला अभि-ईशि ] अभिप्राय-मूल अर्थ, तात्पर्य अभिप्रेत-उद्दिष्ट, अभिलाषित, स्वीकृत अभिवृद्धि-अभ्युदय, बढ़ना अभिव्यक्ति-प्रकट करना अभिसन्धि-जोड़, समझौता अभिसार-आगे बढ़ना, प्रियसे मिलने जाना अभिहित-कहा हुआ अभीष्ट-प्रिय, रुचिकर अभ्यस्त-बार बार अभ्यास किया गया अभ्युदय-उदय अमित-अत्यधिक अरण्य-वन अवगत-जाना हुआ अर्वाचीन-नया, बादमें उत्पन्न हुआ अवतारणा-नीचे लाना, इन्द्रियगोचर करना अवतीर्ण-अवतारके रूपमें प्रकट अवधारण-शब्दके अर्थकी सीमा बाँधना, निश्चय करना अवयव-अङ्ग, अंश अवरुद्ध-रुका हुआ अवलम्बन-आश्रय लेना, सहारा लेना अवलोकन-देखना अवशिष्ट-बचा हुआ, शेष अवस्थान-रहना, अवस्थिति अविचिन्त्य-अचिन्त्य अविच्छिन्न-अविभक्त, लगातार अविच्छिन्न तैलधारावत्-तेलकी धाराके समान अटूट अव्यय-अविकारी अव्याकृत-अव्यक्त अशेष-सम्पूर्ण अष्टसिद्धि-आठ प्रकारकी सिद्धियाँ असङ्ग-आसक्तिहीन असङ्गत-प्रसङ्गविरुद्ध, अनुचित असङ्गति-मेलका ना होना असंस्कृत-संस्कारहीन असमोर्द्ध-जिससे बड़ा और जिसके बराबर कोई नहीं हो असार-सारहीन असूया-ईर्ष्या, दूसरेके गुणमें दोष निकालना आ आख्यायिका-कहानी आच्छन्न-ढका हुआ आत्मविषयणी-आत्म-सम्बन्धी आत्मसात्-अपने अधिकारमें आत्यन्तिक-असीम आदित्य-सूर्य आधान-स्थापन, कोई वस्तु रखनेका स्थान रखना आधिदैविक-देवताओंके द्वारा कृत आधिभौतिक-अन्य प्राणियों द्वारा प्रदत्त आध्यात्मिक-मानसिक, आत्म-सम्बन्धी आपाततः-अचानक, अन्तमें आप्त-पूर्ण, कुशल आम्नाय-वेद, श्रुत, परम्पराप्राप्त उपदेश आयुध-अस्त्र आरूढ़-आसीन आरोहण-चढ़ना, ऊपरकी ओर जाना आर्त्ति-क्लेश, पीड़ा आर्ष-ऋषियोंका आलोचना-गुण-दोष निरूपण आलोच्य-आलोचना योग्य आह्लादित-आनन्दित इ इति-इस प्रकार, समाप्ति इहलोक-यह लोक ई ईक्षण-दृष्टिपात ईशिता-ईश्वरत्व