श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)
Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary
श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा
पृष्ठ 520, कुल 2549 में से
संदर्भ में पढ़ें[ घ्राण-निमज्जत घ घ्राण-गन्ध, सूँघनेकी शक्ति च चित्तगुहा-हृदयरूपी कन्दरा चित्-शक्ति-भगवानकी एक प्रकारकी शक्ति चिदालोचना-चित्-वस्तुकी आलोचना चिन्तामल-चिन्तारूपी मल चिन्मयत्व-चिन्मयता चैतन्यत्व-चेतनता चैतन्यनिष्ठ-चित्-वस्तुमें जिसकी निष्ठा है चैतन्यहीन-चेतनारहित छ छन्दविद्या-अठारह विद्याओंमें एक ज जर्जरित-जो जर्जर हो गया हो त तत्त्वज्ञान-तत्त्ववस्तुका ज्ञान तत्त्वतः-यथार्थतः तत्त्वविद्-तत्त्वको जाननेवाला तदीय-भगवत्-सम्बन्धी तनय-पुत्र तन्मय-तल्लीन तादात्म्य-दो वस्तुओंके परस्पर अभिन्न होनेका स्वभाव तारतम्य-दो वस्तुओंके घट-बढ़कर होनेका भाव तिर्यग्-पशु-पक्षी तैलधारावत्-तैलकी भाँति धारावाला त्रिगुणातीत-तीनों गुणोंसे अतीत त्रिवर्ग-धर्म, अर्थ और काम द दिक्पाल-दश दिशाओंके रक्षक देवता दुर्ज्ञेय, दुर्बोध-कठिनाईसे जानने योग्य दुर्निगृहीत-कठिनाईसे वशमें लाया हुआ दुर्वारित-कठिनाईसे निवारण किया हुआ दुरूह-कठिन दुस्त्याज्य-नहीं त्यागने योग्य देदीप्यमान-चकमता-दमकता हुआ देहाध्यास-देहमें मिथ्या अभिमान द्रव्यमययज्ञ-द्रव्य द्वारा किया गया यज्ञ द्विजवर-ब्राह्मणश्रेष्ठ द्वैतभाव-दो होनेका भाव ध धूसरित-धूलसे भरा हुआ ध्वनित होना-पता चलना न नराकृति-मनुष्यके समान आकृति नामाभास-नामका आभास निःशक्तिक-शक्तिरहित निःश्वास-प्राणवायु या साँसका बाहर निकलना निःसृत-निकला हुआ निकृष्ट-तुच्छ निकेतन-घर निक्षेप करना-फेंकना निगृहीत-निग्रह किया हुआ निग्रह-संयम नितान्त-अत्यन्त, एकदम निमज्जत-डूबा हुआ, स्नात ४७८ | श्रीश्रीचैतन्यचरितामृत