भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

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श्रीचैतन्यचरितामृत आदिलीला उत्तरार्द्धमें उद्धृत प्रमाण-ग्रन्थ तालिका एकादशी-तत्त्व—16/58; उद्वाह-तत्त्व—15/27; उज्ज्वलनीलमणि—17/293; केशव-काश्मीरी-श्लोक—16/41; बृहन्नारदीयपुराण—17/21; ब्रह्मवैवर्त्तपुराण—17/164; भक्तिरसामृतसिन्धु—8/17; भरतमुनि-वाक्य—16/71; भागवत—8/19, 25, 58; 9/42, 43, 46; 13/77; 14/69; 17/76, 78; मलमासतत्त्व—17/164; महाभारत—17/308; ललितमाधव—17/281; श्रीचैतन्यचन्द्रोक्त-श्लोक—16/82; 17/31; सामुद्र—14/15 ॥ अमृतप्रवाह भाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका पुरुषसूक्त—17/18; बृहद्व्याकरण—13/29; भक्तिरसामृतसिन्धु—8/58; योगवाशिष्ठ—17/65; रामाष्टक—17/69; लघु-व्याकरण—13/29; सामुद्रिक ग्रन्थ—13/120 ॥ अनुभाष्यमें उद्धृत ग्रन्थादि-तालिका अथर्ववेद-संहिता—14/19; अद्वैतचरित—12/13-18, 27; अभिज्ञान-शकुन्तल—16/101; उत्तरचरित—16/101; एकादशी-तत्त्व—17/265, 266; कुमारसम्भव—16/101; कूर्मपुराण—17/78; कृष्णगणोद्देशदीपिका—12/83; कौस्तुभप्रभा—16/25; गीतगोविन्द या अष्टपदी—13/42; गौतमीय-तन्त्र—17/293; गौरगणोद्देशदीपिका—8/41, 59-60, 66; 9/14, 10/8, 14-17, 21-25, 29, 31-38, 40, 53, 56, 61-63, 67-68, 70-71, 73, 75-78, 80, 84-85, 91, 106-115, 119-120, 130-131, 134-136, 139, 143, 153; 11/13, 21, 23-26, 29, 31-33, 37-39, 41-42, 44-45, 51, 53-54; 12/13-18, 57-59, 65, 79-81, 83-87; 13/56, 60-61, 74; 14/68; 15/29; 17/296, 300-301; चण्डीदास-गीतिग्रन्थ—13/42; चैतन्यचन्द्रामृत—13/123; चैतन्यचन्द्रोदय-नाटक—13/89; 17/55; चैतन्य-चरित महाकाव्य—10/49, 62, 136; 14/62-68; 17/55; चैतन्यभागवत—9/11, 14; 10/30-32, 34-37, 41, 43-47, 49, 53, 58, 64, 67-73, 75-77, 113, 115, 126, 131, 135; 11/20, 23, 26, 28, 29, 31, 33-39, 41-47; 12/13-17, 40-42; 13/28, 29, 67-71; 14/19, 21-23, 25, 37-40, 73; 15/7, 23, 31; 17/7-12, 17-20, 23, 31, 37, 55, 64-65, 69-71, 79-86, 99-100, 103-114, 116, 124, 138-142, 228-230, 241-243, 262, 274, 278; चैतन्यमङ्गल (श्रीलोचनदास)—14/46; 17/69, 89, 95, 119; छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्कर-टीका)—17/78; तत्त्व-सन्दर्भ—10/105; नरोत्तमदास ठाकुरकी प्रार्थना—13/123; दशम-टिप्पणी (वैष्णवतोषणी)—17/78; नरोत्तमविलास—12/13-17; नित्यानन्दायिनी पत्रिका—12/13-17; पद्मपुराण—8/16; प्रेमतरङ्गिणी—12/58; भक्तिरत्नाकर—10/78, 84, 85, 91, 105; 11/13, 25; 12/58; 16/25; 17/55; भक्तिरसामृतसिन्धु—8/16; 14/90; ii