भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 814, कुल 2549 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 814

[ कहिते-केशव कहिते चाहये किछु ना 16/88 | किबा कोलाहल करे 14/81 | कृष्णपूजा करे तुलसी 13/70 कहिते लागिला प्रभु 17/216 | किशोर-वयसे आरम्भिला 13/31 | कृष्णप्रेममय-तनु, उदार 8/59 कहिते लागिला लोके 17/132 | कीर्त्तन करिते प्रभु करिला 17/224 | कृष्णप्रेम-लीलामृते 13/13 कहिते, शुनिते ऐछे 17/240 | कीर्त्तन करिते प्रभु, आइला 17/89 | कृष्णप्रेमा दिते, निते 11/26 काजी कहे,-"आज्ञा 17/152 | कीर्त्तन करिलुँ माना 17/178 | कृष्णप्रेमामृत वर्षे, ये 11/30 काजी कहे,-"इहा 17/11 | कीर्त्तन ना वर्ज्जिया घरे 17/191 | कृष्णप्रेमे पुलकाश्रु-विह्वल 8/22 काजी कहे,-"तुमि 17/146 | कीर्त्तन शुनि' बाहिरे तारा 17/36 | कृष्ण-बलराम दुइ 13/78 काजी कहे,-"तोमार 17/155 | कीर्त्तने नर्त्तन करे बड़ 12/20 | कृष्ण बलिले अपराधीर 8/24 काजी कहे,-"मोर 17/222 | कीर्त्तनेर कैल प्रभु तिन 17/135 | कृष्णभक्ति पाय, ताँरे 11/29 काजी कहे,-"यबे 17/178 | कीर्त्तनेर ध्वनिते काजी 17/141 | कृष्णमिश्र-नाम आर 12/18 काजीगणेर मुखे येंह 10/53 | कुम्भीपाके पचे सेइ 17/307 | कृष्ण यदि छुटे भक्ते 8/18 काजी-पाशे आसि' सब 17/124 | कुलाधिदेवता मोर 8/80 | कृष्णलीला भागवते कहे 8/34 काजी बले,-"सबे 17/175 | कुलीनग्रामवासी सत्यराज 10/80 | कृष्णवश-हेतु एक 17/75 काजीर भये स्वच्छन्द 17/131 | कुलीनग्रामीर भाग्य कहेन 10/83 | कृष्णसङ्ग देह' मोरे 17/21 काजीरे बसाइला प्रभु 17/144 | कृतघ्न हइला, ताँरे 12/68 | कृष्णस्मृति बिना हय 12/51 काजीरे विदाय दिल 17/225 | कृपा करि' कर मोर 17/270 | 'कृष्ण' 'हरि' नाम 13/23 काटिलेह तरु येन किछु 17/28 | कृपा करि' कर यदि 16/35 | कृष्णेर अचिन्त्यशक्ति 17/305 कान्दिया बलेन शिशु 14/27 | कृष्ण अवतरि' करेन 13/69 | कृष्णेर आह्वान करे सघन 13/71 कायमनोवाक्ये करे 8/62 | कृष्ण अवतारिते आचार्य 13/70 | कृष्णेर कीर्त्तन करे नीच 17/211 कार पदचिह्न घरे, ना 14/8 | कृष्ण अवतारिया कैला 17/298 | कृष्णेर ये साधारण सद्गुण 8/57 काला-कृष्णदास बड़ 11/37 | कृष्णकथा, कृष्णपूजा 13/66 | कृष्णेर वियोगे यत प्रेम 13/43 काशीमिश्र, प्रद्युम्नमिश्र 10/131 | कृष्ण-कृपा नाहि तार 8/7 | “के आछिलुँ पूर्वजन्मे 17/104 काशीश्वर गोसाञिर शिष्य 8/66 | 'कृष्ण' 'कृष्ण' 'हरि' 13/92 | के करिते पारे ताँहा 12/93 काष्ठ-पाषाण द्रवे याहार 11/19 | कृष्णदास-नाम शुद्ध 10/145 | "केने चुरि कर, केने 14/42 काठेर पुत्तली येन कुहके 8/79 | कृष्णदास ब्रह्मचारी 12/84 | केने पर-घरे याह 14/42 काँहा तुमि सर्वशास्त्रे 16/34 | कृष्णदास वैद्य, आर 10/109 | केमने ए सब अर्थ करिले 16/92 काहाँ आमि सबे शिशु 16/34 | 'कृष्णनाम' करे अपराधेर 8/24 | केमने ए सर्वलोकेर 13/68 काहाके वा स्तुति करे 14/81 | कृष्णनाम-बीज ताहे ना 8/30 | केबा आसे केबा याय 13/107 कि-कारणे लीला,-इहा 15/22 | कृष्णनाम-सह यैछे प्रभुर 17/325 | के वर्णिते पारे, ताहा 13/44 किछुमात्र करि' कहि' 12/77 | कृष्णनामे भासाइल 13/30 | केवल ए गण-प्रति 12/71 किन्तु ताँर दैवे किछु 12/32 | कृष्ण देखि' गोपी कहे 17/286 | केवल नीलाचले प्रभुर 10/123 किन्तु सर्वलोक देखि' 13/67 | "कृष्णनाम ना लओ केने 17/249 | 'केवल'-शब्दे पुनरपि 17/24 कि पण्डित, कि तपस्वी 12/72 | कृष्ण नाहि माने, ताते 8/9 | केशव भारती आइला 17/268 278 | श्रीचैतन्यचरितामृत