भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

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पृष्ठ 823

प्रति-प्रेम ] प्रति वर्षे प्रभुर गण 10/55 | प्रभु ताँर नाम कैला 10/35 | प्रभुर निन्दाय सबार बुद्धि 17/257 प्रत्यब्दे प्रभुरे देखे 10/128 | प्रभु ताँर पूजा पाञा 14/68 | प्रभुर नृत्य देखि' नृत्य 17/101 प्रथम-चरणे पञ्च 'त' 16/74 | प्रभु ताँरे नमस्करि' 17/269 | प्रभुर पड़ुया दुइ 10/72 प्रथम परिच्छेदे कैलुँ 17/313 | प्रभु तारे कराइल निजरूप 17/231 | प्रभुर भोगसामग्री ये करे 10/25 प्रथमेइ नित्यानन्देर याँर 10/34 | प्रभु तारे प्रेम दिल 17/114 | प्रभुर मध्य-शेष-लीला 13/16 प्रथमे त' आचार्येरे 12/8 | प्रभु तारे प्रेम दिल 17/102 | प्रभुर लीलामृत तँहो 13/50 प्रथमे त' सूत्ररूपे 13/7 | प्रभु तुष्ट हञा साध्य 16/15 | प्रभुर विरह-सर्प लक्ष्मीरे 16/21 प्रथमेते वृन्दावन-माधुर्य 17/235 | 'प्रभु-पादौपाधान' याँर 10/33 | प्रभुर वृत्तान्त द्विज 17/253 प्रथमे षड्भुज ताँरे 17/13 | प्रभु पुनः प्रश्न कैल 17/107 | प्रभुर शाप-वार्त्ता शुने 17/64 “प्रद्युम्न ब्रह्मचारी' ताँर 10/58 | प्रभुप्रिय गोविन्दानन्द 10/64 | प्रभुर हृदय द्रवे शुनि' 10/49 प्रभु आज्ञा दिल,-“तुमि 16/16 | प्रभु बोले,-“ए लोक 17/177 | प्रभुरे अनेक ग्रन्थ दियाछे 10/65 प्रभु आज्ञा दिल-“याह 17/130 | प्रभु बोलेन,-“आमि 17/145 | प्रभुरे कहेन,-“तोमार ना 12/44 प्रभु-आज्ञाय कर एइ 17/33 | प्रभु बोलेन-तुमि मोर 10/20 | प्रभुरे शान्त करि' आनिल 17/252 प्रभुकण्ठ हैते माला 8/75 | प्रभु यबे काशी आइला 10/153 | प्रभु श्रीवासेरे तोषि' 17/240 प्रभुके मिलिया पाइला 17/12 | प्रभु याँर नित्य लय 10/68 | प्रभु सङ्गे नृत्य करे 17/102 प्रभु कहे,-“आमा' पूज 14/66 | प्रभुर अङ्गे नाचे, डम्बुरु 17/99 | प्रभु-सङ्गे रहे गोविन्द 10/118 प्रभु कहे, आमि 'विश्वम्भर' 9/7 | प्रभुर अतिप्रिय दास 10/69 | प्रभु समर्पिल ताँरे 10/92 प्रभु कहे,-"एक दान 17/221 | प्रभुर अत्यन्त प्रिय 10/29 | प्रभु-स्थाने निवेदिल 17/129 प्रभु कहे,-“एकादशीते 15/9 | प्रभुर अनन्त-लीला 16/18 | प्रभुस्थाने याइते सबे 10/54 प्रभु कहे,-“कह श्लोकेर 16/45 | प्रभुर अभिषेक तबे 17/11 | प्रभु हासि' कैला,-“तुमि 17/110 प्रभु कहे,-'कुलीनग्रामेर 10/82 | प्रभुर आज्ञाते तँहो 10/108 | प्रवृत्ति-मार्गे गोवध 17/157 प्रभु कहे,-"गोदुग्ध 17/153 | प्रभुर आज्ञा पाञा 10/157 | प्रसङ्गे करिल एइ 17/310 प्रभु कहे,-"तोमा-सबाके 14/54 | प्रभुर आज्ञाय नित्यानन्द 10/117 | प्रसन्न हइल सब 13/95 प्रभु कहे,-"देवेर वरे 16/44 | प्रभुर आविर्भाव-पूर्वे यत 13/63 | प्रसन्न हैल दशदिक् 13/97 प्रभु कहे,-"प्रश्न लागि' 17/152 | प्रभुर उपरे यँहो कैल 10/31 | प्रहरेक महाप्रभुर चरित्र 10/100 प्रभु कहे,-“बाउलिया 12/49 | प्रभुर कहिल एइ जन्मलीला 14/3 | प्रह्लाद-समान ताँर गुणेर 10/45 प्रभु कहे,-"माता, मोरे 15/8 | प्रभुर कीर्त्तनीया आदि 10/64 | प्राणवल्लभ-सबार 12/89 प्रभु कहे,-“वेदे कहे 17/159 | प्रभुर कृपाय तँहो 10/158 | प्रातःकाले भक्त सबे 17/246 प्रभु कहे,-"व्याकरण 16/33 | प्रभुर गम्भीर वाक्य 12/54 | प्रातःकाले श्रीवास ताहा 17/40 प्रभु कहेन,-“अतएव 16/51 | प्रभुर गुप्तसेवा कैल 10/92 | प्राते आसि' प्रभुपदे लइल 16/107 प्रभु कहेन,-"कहि, यदि 16/47 | प्रभुर चरण धुँइ बोले 17/219 | प्रेम दिते, कृष्ण दिते 11/59 प्रभु कहेन,-“कहि, शुन 16/53 | प्रभुर चरण धरि' वक्रेश्वर 10/18 | प्रेम-नाम प्रचारिया 13/36 प्रभु कृपा कैल, ताँर 16/107 | प्रभुर चरणे यदि आज्ञा 8/75 | प्रेम-फल-फूल करे 10/79 पद्य सूची | 287