भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

DevanagariHindipublished2,549 पृष्ठ

पृष्ठ 832, कुल 2549 में से

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पृष्ठ 832

[ सुपठित-हरि सुपठित विद्या कारओ ना 17/257 | सेइ दुइस्कन्धे शाखा यत 9/22 | से-सब गुणेर ताँर 8/57 सुबुद्धि मिश्र, हृदयानन्द 10/111 | सेइ देशे विप्र, नाम-मिश्र 16/10 | से-सब सामग्री आगे करिब 10/28 सुवर्णेर कड़ि-बउलि 13/112 | सेइ नन्दसुत-इहाँ 17/295 | से-सब सामग्री यत झालिते 10/26 सुशील, सहिष्णु, शान्त 8/55 | सेइ नामे आमि तोमाय 17/175 | से सम्बन्धे हओ तुमि 17/149 सुस्थ हञा कहे प्रभु अपूर्व 15/17 | सेइ नित्यानन्द-कृष्णचैतन्य 17/296 | सेह महावैष्णव हय 8/38 सूक्ष्म विचारिये यदि आछये 16/84 | सेइ पत्रीर कथा आचार्य 12/30 | सोनार मुषल हल ये 10/73 सूत्र करि' गणे यदि 13/45 | सेइ पापी दुःख भोगे 17/54 | स्कन्धेर उपरे बहु शाखा 9/17 सूत्र करि' ग्रन्थिलेन 13/16 | सेइ पुण्ये हैलाङ आमि 17/111 | स्तनपान करे प्रभु ईषत् 14/35 सूत्र करि' सब लीला 8/45 | सेइ फल खाय, नाचे 9/53 | स्तन पियाइते पुत्रेर चरण 14/11 सूत्रधृत कोन लीला ना 8/47 | सेइ बलदेव-इहँ नित्यानन्द 17/295 | स्थावर हइया धरे 9/32 सूत्ररूपे मुरारिगुप्त 13/15 | सेइ भक्तगणे एबे करिये 10/129 | स्थूल एइ पञ्च दोष 16/84 सूत्र-वृत्ति-टीकाय कृष्णनामेर 13/29 | सेइमत उन्माद-प्रलाप 13/41 | स्फुट करि' कह तुमि 17/177 सूर्यदास सरखेल, ताँर भाइ 11/25 | सेइ मोर प्रिय, अन्य 10/82 | स्फुट नाहि करे दोष-गुणेर 16/26 सृजाइल, जीयाइल, ताँरे 12/68 | सेइ रात्रे एक सिंह महा 17/179 | स्वतःसिद्धज्ञान, तबे शिक्षा 14/88 सेइ अंश कहि, ताँरे 16/27 | सेइ रूप-रघुनाथ प्रभु 10/103 | स्वतन्त्र ईश्वर प्रभु अत्यन्त 8/32 सेइ अनुसारे लिखि लीला 13/47 | सेइरूपे एइरूपे देखि 17/113 | स्वतन्त्र ईश्वर प्रेम-निगूढ 8/21 सेइ आचार्यगणे मोर कोटी 12/75 | सेइ लिखि, मदनगोपाल 8/79 | स्वप्न देखि' मिश्र आसि' 16/14 सेइ आचार्येर गण 12/73 | सेइ वीरभद्र-गोसाञिर 11/12 | स्वप्ने एक विप्र कहे 16/12 सेइ काले दैवयोगे 13/20 | सेइ व्रजेश्वर-इहँ 17/294 | स्वप्नेर वृत्तान्त सब कैल 16/14 सेइकाले निजालय 13/99 | सेइ व्रजेश्वरी-इहँ शचीदेवी 17/294 | स्वमत कल्पना करे 12/9 सेइ कृष्ण, सेइ गोपी 17/304 | सेइ शास्त्रे कहे,-प्रवृत्ति 17/156 | स्वमाधुर्य-प्रेमानन्दरस 17/317 सेइ कृष्णप्रेमफले जगत् 12/6 | सेइ सब लीलार शुनिते 8/49 | स्वयं भगवान् येइ 17/314 सेइक्षणे गौरकृष्ण 13/94 | सेइ सेइ आचार्येर कृपार 12/74 | स्वरूपेर अन्तर्धाने आइला 10/93 सेइ क्षणे जागि' निमाइ 14/10 | सेइ सेइ रसे कृष्ण 17/301 | स्वर्ग वाद्य-नृत्य करे 13/96 सेइक्षणे धाञा प्रभु गङ्गाते 17/245 | सेइ सेइ स्थाने किछु 13/49 | स्वसङ्ग छाड़ाञा केने पाठान 16/18 सेइ चतुर्भुज-मूर्त्ति चाहेन 17/290 | सेइ स्कन्धे यत प्रेमफल 12/6 | स्वेद-कम्प-पुलकादि 8/27 सेइ चिह्न पाये देखि' मिश्रे 14/11 | सेइ हैते एकादशी करिते 15/10 | सेइ जन याय चैतन्येरे 17/309 | सेइ हैते जिह्वा मोर बले 17/200 | ह सेइ जले जीये शाखा 12/66 | सेतुबन्ध, आर गौड़-व्यापि 13/36 | सेइ जले पुष्ट स्कन्ध 12/5 | से दण्डप्रसाद आर लोके 12/42 | सेइ जले स्कन्धे करे 12/7 | से दिन बहुत नाहि कैलि 17/184 | सेइ तुमि हओ,-हेन 17/215 | से पत्रीते लेखा आछे-एइ 12/31 | सेइ दिन एक आमार 17/188 | सेवार अध्यक्ष-श्रीपण्डित 8/54 | 'हरि' 'कृष्ण' 'नारायण' 17/218 296 | श्रीचैतन्यचरितामृत