भारतकोश
श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

श्री चैतन्य चरितामृत (कृष्णदास कविराज गोस्वामी - सम्पूर्ण आदि, मध्य एवं अन्त्य लीला)

Sri Chaitanya Charitamrita of Krishnadas Kaviraj with Hindi Commentary

श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा

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शब्दकोश विगुण-सारगर्भित ] विगुण-गुणहीन विच्युति-भूल, पतन, वियोग विजितात्मा-जिसने मनको जीत लिया है विज्ञ-पण्डित, जाननेवाला विदित-मालूम विधर्म-धर्मविरुद्ध विधिवादिगण-नैतिक लोग विधेय-करने योग्य विधेयात्मा-जिसकी आत्मा संयत हो विन्यास-व्यवस्थित करना विपर्यय-प्रतिकूलता, विपरीतता विभूति-ऐश्वर्य विरहकातर-विरहसे कातर विरोधाभास-विचारमें विरोध प्रतीत होना विलास-क्रीड़ा विवक्षित-इच्छित, कथित विवृत-स्पष्ट, व्यक्त विशारद-निपुण विशिष्ट-विशेषतायुक्त विशिष्टता-विशेषता विशुद्धचित्त-जिसका चित्त शुद्ध है विशेषत्व-विशेषता विषयणी-विषयसे सम्बन्धित विहित-आदेश किया हुआ वृष्टि-वर्षा वेदज्ञ-वेदोंके जाननेवाला वैषम्य-विषमता व्यङ्गोक्ति-गूढ़भाषा, वह भाषा जिसमें व्यङ्ग हो व्यतिक्रम-उल्लङ्घन व्यतिरेक-असङ्गति, निषेध व्यवहृत-व्यवहार किया हुआ व्योम-आकाश श शोच्य-शोचनीय शैव-शिवके उपासक श्रुत-सुना हुआ श्रोतव्य-सुनने योग्य श्लेषोक्ति-छिपे अर्थवाली बात ष षडैश्वर्यपूर्ण-छः ऐश्वर्योंसे परिपूर्ण स सङ्कीर्णता-उदार ना होनेका भाव संवरण-छिपाना संवेदन-अनुभूति संस्पर्श-अच्छी तरहसे होनेवाला स्पर्श संहर्त्ता-संहार करनेवाला सङ्गति-मेल सञ्चित-जमा किया हुआ सदातन-विष्णु सद्विवेकी-सद् विवेकवाला समत्वभाव-समताका भाव सन्निविष्ट-उत्तम रूपसे एकाग्र समाहर-समुच्चय, समूह समाहित-संयमित, व्यवस्थित सम्बन्धविशिष्ट-सम्बन्धवाला सम्मत-सहमत, एक मत समन्वित-संयुक्त, स्वाभाविक रूपसे क्रमबद्ध सम्यक्-भलीभाँति, अच्छी तरह सर्वतन्त्र-समस्त सिद्धान्त सर्वतोभावेन-सम्पूर्ण रूपसे सर्वभूतात्मा-सभी जीवोंके आत्मा अर्थात् परमात्मा सर्वभुक्-सब कुछ खा जानेवाला सर्वात्मकत्व-सर्वात्मकता सहस्र-हजार साम-सामवेद सामर्थ्यविशिष्ट-सामर्थ्यवान् साम्यलक्षण-समानताका लक्षण सारगर्भित-तत्त्वपूर्ण | 305