भारतकोश
श्रीलिंगमहापुराण

श्रीलिंगमहापुराण

Linga MahaPurana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished833 पृष्ठ

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६२८श्रीलिङ्गमहापुराण[ उत्तरभाग
संस्कृत श्लोकहिन्दी अनुवाद
भव इत्युच्यते देवो भगवान् वेदवादिभिः ।<br>सञ्जीवनस्य लोकानां भवस्य परमात्मनः ॥ ५<br>उमा सङ्कीर्तिता देवी सुतः शुक्रश्च सूरिभिः ।<br>सप्तलोकाण्डकव्यापी सर्वलोकैकरक्षिता ॥ ६वेदवेत्ता लोग जलमूर्ति शिवको भव—ऐसा कहते हैं। विद्वानोंके द्वारा लोगोंको जीवन प्रदान करनेवाले परमात्मा भवकी भार्या देवी उमा कही गयी हैं और उनके पुत्र शुक्र कहे गये हैं॥ ५<sup></sup>/<sub></sub>
वह्र्यात्मा भगवान् देवः स्मृतः पशुपतिर्बुधैः ।<br>स्वाहा पत्यात्मनस्तस्य प्रोक्ता पशुपतेः प्रिया ॥ ७<br>षण्मुखो भगवान् देवो बुधैः पुत्र उदाहृतः ।<br>समस्तभुवनव्यापी भर्ता सर्वशरीरिणाम् ॥ ८सभी लोकोंमें व्याप्त रहनेवाले तथा सभी लोकोंके एकमात्र रक्षक अग्निरूप भगवान् शिवको विद्वानोंने पशुपति कहा है। उन परमात्मा पशुपतिकी प्रिय भार्या स्वाहा कही गयी हैं। विद्वानोंके द्वारा भगवान् कार्तिकेय उनके पुत्र कहे गये हैं॥ ६-७<sup></sup>/<sub></sub>
पवनात्मा बुधैर्देव ईशान इति कीर्त्यते ।<br>ईशानस्य जगत्कर्तुर्देवस्य पवनात्मनः ॥ ९<br>शिवा देवी बुधैरुक्ता पुत्रश्चास्य मनोजवः ।<br>चराचराणां भूतानां सर्वेषां सर्वकामदः ॥ १०समस्त भुवनोंमें व्याप्त रहनेवाले तथा सभी जीवोंका भरण-पोषण करनेवाले पवनरूप शिवको विद्वानोंके द्वारा ईशान—ऐसा कहा जाता है। विद्वानोंके द्वारा पवनात्मा जगत्कर्ता भगवान् ईशानकी पत्नी भगवती शिवा कही गयी हैं और इनके पुत्र मनोजव कहे गये हैं॥ ८-९<sup></sup>/<sub></sub>
व्योमात्मा भगवान् देवो भीम इत्युच्यते बुधैः ।<br>महामहिम्नो देवस्य भीमस्य गगनात्मनः ॥ ११<br>दिशो दश स्मृता देव्यः सुतः सर्गश्च सूरिभिः ।<br>सूर्यात्मा भगवान् देवः सर्वेषां च विभूतिदः ॥ १२सभी स्थावर-जंगम प्राणियोंकी समस्त कामनाएँ पूर्ण करनेवाले आकाशरूप भगवान् शिवको विद्वान् भीम—ऐसा कहते हैं। विद्वान् पुरुषोंने दसों दिशाओंको उन महामहिम व्योमात्मा प्रभु भीमकी पत्नियाँ तथा सर्गको उनका पुत्र कहा है॥ १०-११<sup></sup>/<sub></sub>
रुद्र इत्युच्यते देवैर्भगवान् भुक्तिमुक्तिदः ।<br>सूर्यात्मकस्य रुद्रस्य भक्तानां भक्तिदायिनः ॥ १३<br>सुवर्चला स्मृता देवी सुतश्चास्य शनैश्चरः ।<br>समस्तसौम्यवस्तूनां प्रकृतित्वेन विश्रुतः ॥ १४सभीको ऐश्वर्य प्रदान करनेवाले सूर्यरूप भगवान् शिवको देवता लोग भुक्तिमुक्तिदाता भगवान् रुद्र कहते हैं। भक्तोंको भक्ति प्रदान करनेवाले उन सूर्यात्मा रुद्रकी भार्या सुवर्चला कही गयी हैं और शनैश्चर इनके पुत्र कहे गये हैं॥ १२-१३<sup></sup>/<sub></sub>
सोमात्मको बुधैर्देवो महादेव इति स्मृतः ।<br>सोमात्मकस्य देवस्य महादेवस्य सूरिभिः ॥ १५<br>दयिता रोहिणी प्रोक्ता बुधश्चैव शरीरजः ।<br>हव्यकव्यस्थितिं कुर्वन् हव्यकव्याशिनां तदा ॥ १६समस्त सौम्य वस्तुओंकी प्रकृतिके रूपमें प्रसिद्ध सोमरूप शिवको विद्वानोंने महादेव—ऐसा कहा है। मनीषियोंने रोहिणीको उन सोमात्मक प्रभु महादेवकी पत्नी और बुधको उनका पुत्र बताया है॥ १४-१५<sup></sup>/<sub></sub>
यजमानात्मको देवो महादेवो बुधैः प्रभुः ।<br>उग्र इत्युच्यते सद्भििरीशानश्चेति चापरैः ॥ १७<br>उग्राह्वयस्य देवस्य यजमानात्मनः प्रभोः ।<br>दीक्षापत्नी बुधैरुक्ता सन्तानाख्यः सुतस्तथा ॥ १८हव्य-कव्य ग्रहण करनेवाले देवताओं तथा पितरोंके लिये हव्य-कव्यकी व्यवस्था करनेवाले यजमानरूप प्रभु शिवको विद्वानोंने उग्र—ऐसा कहा है तथा दूसरे श्रेष्ठ जनोंने उन्हें ईशान भी कहा है। विद्वानोंने दीक्षाको उन यजमानरूप उग्र नामक शिवकी पत्नी बताया है। उनका पुत्र सन्तान नामवाला है॥ १६-१८॥