श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
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२७ अक्टूबर, १८८२ परिच्छेद १३ ९५
अधिक देर नहीं की जा सकती, रात के साढ़े दस बज गए हैं। राह में चन्द्रमा का प्रकाश छाया है।
गाड़ी आयी। श्रीरामकृष्ण चढ़े। नरेन्द्र और मास्टर ने उन्हें प्रणाम किया और दोनों कलकत्ते में अपने अपने घर लौटे।
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CC-0. In Public Domain. Gurukul Kangri Collection, Haridwar