श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
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श्रीमाताजी का आशीर्वाद
भगवान् श्रीरामकृष्णदेव की लीलासहधर्मिणी परमआराध्या श्री माँ सारदादेवी ने ‘श्रीरामकृष्णकथामृत’ के सम्बन्ध में उसके रचयिता श्री महेन्द्रनाथ गुप्त (श्री ‘म’) को निम्नलिखित पत्र लिखा था :-
“बेटा,
उनके (श्रीरामकृष्णदेव के) निकट तुमने जो बातें सुनी थीं वही बातें सत्य हैं। इस विषय में तुम्हें कोई भय नहीं। किसी समय उन्होंने ही तुम्हारे निकट इन बातों को रख छोड़ा था। अब आवश्यकतानुसार वेही इन्हें प्रकट करा रहे हैं। जान रखो कि इन बातों को व्यक्त किये बिना लोगों का चैतन्य जागृत नहीं होगा। तुम्हारे पास उनकी जो बातें संचित हैं वे सभी सत्य हैं। एक दिन तुम्हारे मुँह से उन्हें सुनकर मुझे ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे स्वयं ही ये सब बातें कह रहे हैं।”