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श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)

श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा

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पृष्ठ 171
१४८श्रीरामकृष्णवचनामृत१८ फरवरी, १८८३

वृक्ष पर पाप-पक्षी बैठे हुए हैं; उनका नाम-कीर्तन करना मानो ताली बजाना है। ताली बजाने से जिस प्रकार वृक्ष के ऊपर के सभी पक्षी भाग जाते हैं, उसी प्रकार उनके नाम-गुणकीर्तन से सभी पाप भाग जाते हैं।

“फिर देखो मैदान के तालाब का जल धूप से स्वयं ही सूख जाता है। इसी प्रकार उनके नाम-गुणकीर्तन से पापरूपी तालाब का जल स्वयं ही सूख जाता है।

“रोज अभ्यास करना पड़ता है। सर्कस में देख आया, घोड़ा दौड़ रहा है, उस पर मेम एक पैर पर खड़ी है। कितने अभ्यास से ऐसा हुआ होगा!

“और उनके दर्शन के लिए कम से कम एक बार रोओ।

“यही दो उपाय हैं, – अभ्यास और अनुराग, अर्थात् उन्हें देखने के लिए व्याकुलता।”

दुमँजले पर बैठकखाने के बरामदे में श्रीरामकृष्ण भक्तों के साथ प्रसाद पा रहे हैं। दिन के एक बजे का समय हुआ। भोजन समाप्त होने के साथ ही साथ नीचे के आँगन में एक भक्त गाने लगे।

(भावार्थ) – “जागो, जागो जननि! हे कुलकुण्डलिनि! मूलाधार में सोते हुए कितने दिन बीत गये!”

श्रीरामकृष्ण गाना सुनकर समाधिमग्न हुए। सारा शरीर स्थिर है, हाथ प्रसाद-पात्र पर जैसा था वैसा ही चित्रलिखित-सा रह गया। और भोजन न हुआ। काफी देर के बाद भाव कुछ कम होने पर कह रहे हैं, “मैं नीचे जाऊँगा, मैं नीचे जाऊँगा।”

एक भक्त उन्हें बड़ी सावधानी के साथ नीचे ले जा रहे हैं।

आँगन में ही प्रातःकाल नामसंकीर्तन तथा प्रेमानन्द में श्रीरामकृष्ण का नृत्य हुआ था। अभी तक दरी और आसन बिछा हुआ है। श्रीरामकृष्ण अभी तक भावमग्न हैं। गानेवाले के पास आकर बैठे। गायक ने इतनी देर में गाना बन्द कर दिया था। श्रीरामकृष्ण दीन भाव से कह रहे हैं, “भाई, और एक बार ‘माँ’ का नाम सुनूँगा।” गायक फिर गाना गा रहे हैं।

(भावार्थ) – “जागो, जागो, जननि! हे कुलकुण्डलिनि! मूलाधार में निद्रितावस्था में कितने दिन बीत गये! अपनी कार्यसिद्धि के लिए मस्तक की ओर चलो, जहाँ सहस्रदल पद्म में परमशिव विराजमान हैं। हे माँ, चैतन्यरूपिणी, षट्चक्र को भेदकर मन के खेद को दूर करो।”

गाना सुनते सुनते श्रीरामकृष्ण फिर भावमग्न हो गये।

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