श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| १७६ | श्रीरामकृष्णवचनामृत | ८ अप्रैल, १८८३ |
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झल रहे थे। एक ने कहा 'मुँह में जरा दूध डालकर तो देखो।' मुँह में दूध डालने पर उन्हें होश आया। आँखें खोलकर ताकने लगे। किसी ने कहा, 'अब यह देखना चाहिए कि इन्हें इतना ज्ञान है या नहीं कि आदमी पहचान सकें।' यह कहकर उसने ऊँची आवाज लगाकर पूछा 'क्यों महाराज, आपको दूध कौन पिला रहा है?' साधु ने धीमे स्वर में कहा, 'भाई! जिसने मुझे मारा था वही अब दूध पिला रहा है।'
“ईश्वर को बिना जाने ऐसी अवस्था नहीं होती।”
मणिलाल – जी हाँ, पर आपने यह जो कहा यह बड़ी ऊँची अवस्था की बात है। भास्करानन्द के साथ ऐसी ही कुछ बातें हुई थीं।
श्रीरामकृष्ण – वे किसी मकान में रहते हैं?
मणिलाल – जी हाँ, एक आदमी के मकान में रहते हैं।
श्रीरामकृष्ण – उम्र क्या है?
मणिलाल – पचपन की होगी।
श्रीरामकृष्ण – कुछ और भी बातें हुई?
मणिलाल – मैंने पूछा, भक्ति कैसे हो? उन्होंने बतलाया, नाम जपो, राम राम कहो।
श्रीरामकृष्ण – यह बड़ी अच्छी बात हैं।
(२)
गृहस्थ और कर्मयोग
मन्दिर में भवतारिणी, राधाकान्त और द्वादश शिवों की पूजा समाप्त हो गयी। अब उनकी भोगारती के बाजे बज रहे है। चैत का महीना, दोपहर का समय है। अभी अभी ज्वार का चढ़ना आरम्भ हुआ है। दक्षिण की ओर से बड़े जोरों की हवा चल रही है। पूतसलिला भागीरथी अभी अभी उत्तरवाहिनी हुई हैं। श्रीरामकृष्ण भोजन के बाद कमरे में विश्राम कर रहे हैं।
राखाल बसीरहाट में रहते हैं। वहाँ गर्मी के दिनों में पानी के अभाव से लोगों को बड़ा कष्ट होता है।
श्रीरामकृष्ण (मणिलाल से) – देखो, राखाल कहता था, उसके देश में लोगों को पानी बिना बड़ा कष्ट होता है। तुम वहाँ एक तालाब क्यों नहीं खुदवा देते? इससे लोगों का कितना उपकार होगा! (हँसते हुए) तुम्हारे पास तो बहुत रुपये हैं, इतने रुपये रखकर क्या करोगे? वैसे सुना है, तेली लोग बड़े हिसाबी होते हैं। (श्रीरामकृष्ण के साथ दूसरे भक्त भी हँस पड़े)।
मणिलाल कलकत्ते की सिंदूरियापठटी में रहते हैं। सिंदूरियापठटी के ब्राह्मसमाज