श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
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१० श्रीरामकृष्णवचनामृत मार्च, १८८२
को पुकारता भर है। उसकी माँ जहाँ उसे रखती, वहीं वह रहता है – कभी राख की ढेरी पर कभी जमीन पर, तो कभी बिछौने पर। यदि उसे कष्ट होता है तो बस वह 'मिऊँ-मिऊँ' करता है ओर कुछ नहीं जानता। माँ चाहे जहाँ रहे 'मिऊँ-मिऊँ' सुनकर आ जाती है।"
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