श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
पृष्ठ 455, कुल 711 में से
संदर्भ में पढ़ें४३२ | श्रीरामकृष्णवचनामृत | ५ जनवरी, १८८४
चित्शक्ति और चिदात्मा
श्रीरामकृष्ण — (पंचवटी की ओर देखकर) — इस पंचवटी में मैं बैठता था — ऐसा भी समय आया कि मुझे उन्माद हो गया! वह समय भी बीत गया! काल ही ब्रह्म है। जो काल के साथ रमण करती है, वही काली है — आद्याशक्ति अटल को टाल देती हैं।
यह कहकर श्रीरामकृष्ण गाने लगे।
(भावार्थ) 'तुम्हारा भाव क्या है, यह सोचते हुए यहाँ तो प्राण ही निकलने पर आ गये! जिनके नाम से काल भी दूर हट जाता है, जिनके पैरों के नीचे महाकाल पड़े हुए हैं, उनका स्वरूप काला क्यों हुआ?'
श्रीरामकृष्ण — आज शनिवार है, आज काली मन्दिर जाना।
बकुल के पेड़ के नीचे आकर श्रीरामकृष्ण मणि से कह रहे हैं — "चिदात्मा और चित्-शक्ति। चिदात्मा पुरुष हैं और चित्-शक्ति प्रकृति। चिदात्मा श्रीकृष्ण हैं और चित्-शक्ति श्रीराधा। भक्तगण उसी चित्-शक्ति के एक-एक स्वरूप हैं। वे सखी-भाव या दासभाव को लेकर रहेंगे। यही असली बात है।"
सन्ध्या हो जाने पर श्रीरामकृष्ण काली-मन्दिर गये। मणि माता का स्मरण कर रहे हैं, यह देखकर श्रीरामकृष्ण प्रसन्न हुए।
सब देवालयों में आरती हो गयी। श्रीरामकृष्ण अपने कमरे में तख्त पर बैठे हुए माता का स्मरण कर रहे हैं। जमीन पर सिर्फ मणि बैठे हैं। श्रीरामकृष्ण समाधिस्थ हो गये हैं।
कुछ देर बाद वे समाधि से उतरने लगे; परन्तु फिर भी अभी भाव पूर्ण मात्रा में हैं। श्रीरामकृष्ण माँ से बातचीत कर रहे हैं, जैसे छोटा बच्चा माँ से दुलार करते हुए बातचीत करता है। माँ से करुण स्वर में कह रहे हैं — "माँ, क्यों तूने वह रूप नहीं दिखाया — वही भुवन-मोहन रूप! कितना मैंने तुझसे कहा। परन्तु कहने से तू सुनेगी काहे को? — तू इच्छामयी जो है।"
श्रीरामकृष्ण ने माँ से ऐसे स्वर में ये बातें कहीं कि जिसे सुनकर पत्थर भी पिघलकर पानी हो जाय!
श्रीरामकृष्ण फिर माँ से बातचीत कर रहे हैं —
"माँ! विश्वास चाहिए! यह साला तर्क-विचार दूर हो जाय! — उसका भरोसा क्या? वह तो जरा-सी बात से बदल जाता है! विश्वास चाहिए — गुरुवाक्य में विश्वास — बालक जैसा विश्वास! — माँ ने कहा, वहाँ भूत है — तो उसने ठीक समझ रखा है कि वहाँ भूत है! माँ ने कहा, वहाँ हौआ है! तो इसीको उसने ठीक समझ रखा है। माँ ने कहा, वह तेरा दादा है, तो समझ लिया कि बस सोलहों आने दादा है! विश्वास चाहिए!