श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)

श्री रामकृष्ण वचनामृत (प्रथम भाग - सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा अनूदित)
Sri Ramakrishna Vachanamrita (Part 1 - Tr. Nirala)
श्री 'म' (महेंद्रनाथ गुप्त) / सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा
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५४४ श्रीरामकृष्णवचनामृत २५ जून, १८८४
देना। इसी प्रकार ‘पांकाल’ मछली की तरह रहना। वह रहती है कीच में, परन्तु उसकी देह बिलकुल साफ रहती है।
“गोलमाल में ‘माल’ है, ‘गोल’ निकालकर ‘माल’ ले लेना।”
श्रीरामकृष्ण गाड़ी पर बैठे। गाड़ी दक्षिणेश्वर की ओर चल दी।
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