श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रंथ और ग्रंथकारोंकी सूची इस सूचीपत्रकी स्थूलरूपमे छानबीन करनेमेभी पाठक उसकी रचनाकी कल्पना कर सकेंगे। ग्रंथ और ग्रंथकारोके नाम अक्षरानुक़्रमसे दिये गये हैं और एकही स्वरूपके ग्रंथोंकी तालिका एकही दी गई है। युरोपियन ग्रंथकारोंकी मूचि स्वतंत्र- रूपसे दी गई है। गीताके रहस्यके स्पष्टीकरणके लिये विषयविवेचनके अनुरोधसे आनेवाले व्यक्तियोंका निर्देश स्वतंत्र शीर्षकके नीचे किया गया है और पारि- भाषिक शब्दोंका समावेश व्याख्याओंमें किया गया है। टि. से टिप्पणी समझे। ग्रंथ और ग्रंथकार अ ईशावास्योपनिषद् २०८, २३२, २७८, अग्निपुराण ४ ३१४, ३२१, ३५३, ३६१, ३६२, अथर्ववेद २५८ ३६३, ३६४, ३९०, ५२९, ५३३, अध्यात्म रामायण ४, ६, ३१८ ५४२, ६३७, ७१९ अनंताचार्य ३६५ ईश्वरगीता ३ अपरार्कदेव ३६४ उ अमरकोश ५६, १९० टि. उत्तरगीता ३, ३२३ अमितायुसुत्त ( पाली ) ५७० टि., ५८३ उत्तररामचरित ७२ अमृतनादोपनिषद् ७१७ उदान ( पाली ) ६३६ अमृतबिंदूपनिषद् २४८, २८९, ५४४ उपनिषद् ( तालिका देखो ) अर्जुनमिश्र ३ ऊ अवधूत गीता ३ ऊरुभंग ५ अश्वघोष ६०, ४९४ टि., ५६१, ५७० ऋ अष्टादश पुराणदर्शन ४ ऋग्वेद ३३, १७१, २०८, २१४, २२५, अष्टावक्र गीता ३ २४६, २५२, २५३, २५५, २५८, आ २५९, २६५, २८३, २९४, २९९, आनन्दगिरि ७६ टि., ३१५, ५३४, ५३७ ३४६, ३६२, ३९७, ४२५, ६६१, आनन्दतीर्थ ( मध्वाचार्य देखो) ६८८, ७६७, ७७९, ८०७, ८२२ आपस्तंबीय धर्मसूत्र ३५२ ऐ आश्वलायन गृह्यसूत्र ५२५, ५६२ ऐतरेय ब्राह्मण ७२ आर्षेय ब्राह्मण ५१० ऐतरेयोपनिषद् १७१, २२६ ई ओ ईश्वरकृष्ण १५४ टि., १६३ टि., १८२ ओक ( कृ. गो. ) १९० टि.