भारतकोश
श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)

Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा

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९०६ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र सुखवाद (आधिभौतिक) ७६ विचार १४३, १५० सूक्ष्म १६० क्षेत्रक्षेत्रज्ञविचार १३२, १४३ सूक्ष्मशरीर २६३ क्षेत्रज्ञ (आत्मा) १४९ स्थितप्रज्ञ ३७६, ४६३ ज्ञ सेश्वर नैयायिक १५२ ज्ञ १६३ स्थूल १६० ज्ञान २०२, २७८, २७९, २८० स्मार्त ३४४, ३४५ ज्ञान और विज्ञान ३१३, ४६१, ४६२, स्मार्त कर्म ५४ ४६३ स्मार्त यज्ञ ५४ ज्ञानकर्मसमुच्चयपक्ष ४३२ स्वधर्म ४९७ ज्ञानकांड २१२ स्वार्थ (सिज्विक-हेल्वेशियस) ८२, ८८ ज्ञानकी पूर्णावस्था २३०, २३१ स्वार्थ (केवल, चार्वाक) ७७, ५८, ७९ ज्ञाननिष्ठा १४, ३०४, ४१३, ४५६ स्वार्थ (दूरदर्शी, हॉब्स) ८०, ८१ ज्ञान-भक्तियुक्त कर्मयोग ४७४ स्वार्थ (उदात्त-भूतदयासे प्रेमयुक्त) ८३ ज्ञानमय कोश २६३ ह ज्ञानमार्ग ४१४, ४१५, ४२९, ४६२ हीनयान ५८ ज्ञानी २९७ क्ष ज्ञानेंद्रियोका व्यवहार १३३, १३८ क्षराक्षरविचार अथवा व्यक्ताव्यक्त-