श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९०८ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र २. सूत्र ( षड्दर्शन ) :- जैमिनी ( मीमांसा अथवा पूर्वमीमांसा ), ब्रह्म ( वेदान्त, शारीरक अथवा उत्तर-मीमांसा ), न्याय ( गौतम ), योग ( पातंजल ), सांख्य ( सांख्यकारिका ), वैशेषिक । ( ३ ) अन्य सूत्र :- आपस्तंब, आश्वलायन, गृह्यशेष, तैत्तिरीय, नारद, नारद- पंचरात्र, बोधायनधर्म, बोधायनगृह्य, शांडिल्य । ( ४ ) व्याकरण :- पाणिनी । ( ५ ) इतिहास :- रामायण, महाभारत ( हरिवंश ) । ( ६ ) पुराण :- अष्टादश-महापुराण, अष्टादश-उपपुराण और गीताएँ । अष्टादश-पुराण :- अग्नि, कूर्म, गणेश, गरुड, गौडीय पद्मोत्तर, देवी-भागवत, नारद, नृसिंह, पद्म, ब्रह्मांड, भागवत, मत्स्य, मार्कंडेय, लिंग, वराह, विष्णु, स्कंद, हरिवंश । गीताएँ :- अवधूत, अष्टावक्र, ईश्वर, उत्तर, कपिल, गणेश, देवी, पराशर, पांडव, पिंगल, ब्रह्म, बोध्य, भिक्षु, मंकि, यम, राम, विचित्र्यु, व्यास, वृत्त, शिव, शंपाक, सूत, सूर्य, हरि, हंस, हारीत । ( ७ ) पाली-ग्रंथ :- अमितायुसुत्त, उदान, चुल्लवग्ग, तारानाथ, तेविज्जसुत्त ( तैविद्यसूत्र ), थेरगाथा, दशरथजातक, दीपवंस, धम्मपद, ब्रह्मजालसुत्त, ब्राह्मणधम्मिकमुत्त, महापरिनिब्बाणसुत्त, महावंस, महावग्ग, मिलिंदप्रश्न, वत्थुगाथा, सद्धर्मपुंडरीक, सुत्तनिपात, सेल्लसुत्त, सब्बासवसुत्त ।