सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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८ | सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां | ---|---|---
| अलिरयं नलि (चा.नी. १५.१५) २२३।७३ | अविद्रासमल लोके (म.२.२१४) ३४९।५३ | अशेषविघ्नप्रतिषेध २।१७ |
| अलीकरूपो यदि २७०।२१ | अविद्वानपि भू (हि ३ ११३) १४८।२३७ | अशोच्यानीह (पञ्च १.३६४) १६४।५१४ |
| अलौकिकमहालोक १०३।५५ | अविधेयो मृत्यज (सु २८५०) १६९।७२५ | अशोच्यो निर्धन १६१।३८७ |
| अल्पं निर्मितमा (कुव ९७) २६५।२६५ | अविनयभुवामज्ञा (सु ३६४) ४१।६२ | अश्नीमहि वयं (भर्तृ ३ ५६) ३६७।७ |
| अल्पश्रुतत्व एव (सु ३९६) ५८।१७२ | अविनाशिनमग्राम्यम ३७।६० | अश्रान्त हृटय २५८।३४ |
| अल्पाक्षररमणीयं य ८५।८ | अविनीत सुतो जात ९०।८ | अश्रुच्छलेन सु(सा द १०.४५) २६०।११३ |
| अल्पानामपि वस्तूना (हि १ ३०) ८३।२ | अविभावितेषु (शिशु ९ ४०) ३००।६५ | अश्व शस्त्रं (पञ्च १ १२४) ८६।१० |
| अल्पाय़ासंबलेन २३३।११४ | अविभाव्यतारक (शिशु ९ १२) २९४।४० | अश्व नैव गजं नैव १५६।१३६ |
| अल्पीयसामेव (सु ५४१) १७३।८७७ | अविरतमविरामा ३२३।२० | अश्वप्लुत्त वासवग (विक्रम ९) १७२।८२८ |
| अल्पीयसैष (शा प अ ३) २१७।४४ | अविरतं परकार्य (रसगङ्गाधर) ५०।१८९ | अश्वमेधसहस्रं (म १ ३०९५) ८३।२ |
| अल्पेच्छधृतिमा (हि २.५३) १४५।१२८ | अविताम्बुजसग १७।४ | अश्वा यस्य (शा प १६७२) १४३।५० |
| अल्पेनापि सुरक्ते (सु १५०८) २६१।१३८ | अविरलकमलविकास ३३१।१३ | अष्टकुलाचलसप्त (मोहमुद्ग.) ३७३।१७३ |
| अवंशपतितो (चा नी ८०) १६२।४१२ | अविरलकरवाल (सा द १०.९७) १०४।९४ | अष्टपादश्वतु कर्णे १८४।२२ |
| अवगच्छति (रघु ८.८७) २६९।९२७ | अविरलपरिवाहै (शा प ३८८८) २८८।४५ | अष्टौ यस्य दिशो दला १८।३४ |
| अवज्ञात्रुटितं प्रेम १५८।२२१ | अविरलफलि (किरात १०.०८) ३४६।१३ | अष्टौ हाटककोट (शा प ५६५) २०५।१० |
| अवज्ञानात्प्राज्ञो (हि.२ ७५) १५२।४१२ | अविरलमदधारा वौंत २।२४ | असख्यपुष्पोऽपि (सु १८४८) ३३४।१०४ |
| अवतु न सवितुस्तु (कुव १२०) २८।२० | अविरलमिदमम्भ ३३९।११४ | असुतुष्टा द्विजा (चा नी.८०) १६२।४११ |
| अवद्यजम्बालगवेषणा ४०।३५ | अविरलगलन्मदजल (रसगङ्गाधर) २।१० | असपादयन (शिशु २ ४७) ८१।२ |
| अवधार्य कार्यगु २९७।१८ | अविवेककतिर्नृपति १५१।३६९ | असमथ हेममृग (हि १ २४) ९२।५३ |
| अवनम्य वक्षसि (शिशु ९ ७४) ३१०।६ | अविवेकि कुचद्वन्द्व (कुव ३५) २६१।२५१ | असमभवगुणस्तु (छृ श ६०) ३५९।६९५ |
| अवन्ध्यकोपस्य (किरात १ ३३) १५२।४०१ | अविवेकिनि (शा.प रा ८६) १४६।१५९ | असभाव्य न वक्त १६२।४१६ |
| अवय केवलकवय ३३।२३ | अविशीर्णकान्तपात्रे ३६१।९ | असमृतं मण्डन (रसगङ्गाधर) २५५।२० |
| अवयवेषु २७०।४३२ | अविश्राम वहे (चा नी.७०) १६२।४०१ | असंभोगेन सामा (हि १.१५२) ७१।२९ |
| अवलम्बितविष्णुपद ८२।२६ | अविश्वसन्धूर्तधुरध २५१।३८ | असमाप्ते तपोवृद्धि. १६०।३२९ |
| अवलोकनमति (शा प ३३६९) २५१।२१ | अवृत्तिकं त्यजे (शा प नी.४०) १५३।२९ | असमुखालोकनमा ३१।८५ |
| अवलोकितमनुगे २२१।०७ | अवृत्तिभयम (सु २०४) ८०।२६ | असंशय न्यस्त (किरात ८.३८) ३३८।८१ |
| अवलोक्य स्तनौ (शा प ५२१) १८४।९ | अवेक्ष्य स्वात्मानं (सु ४५२) ६१।२५४ | असंजन संजनसङ्गि ८७।२५ |
| अवशेन्द्रियचि (हि १.१६) १६३।४३८ | अवेमव्यापाराकलन २२१।३६ | असती भवति स १७१।७८० |
| अवश्यं याता (भर्तृ ३.१३) ३६८।४२ | अव्यक्तादीनि (भाग २ २८) ३७२।१५८ | असात्प्रलाप पारु (सु २९६३) १६६।५७७ |
| अवश्यकारणं प्रा २२७।१५१ | अव्यवसायिनमलस (हि २ ३) ६२।११ | असत्यता (का नी १० ३९) १७४।९१२ |
| अवश्यंभव्येष्व (सु ३१४७) ९२।६१ | अव्याकरणमधीत १७०।७५९ | असत्यमप्रत्ययमूलका ८३।२ |
| अवश्यंभाविनो भावा (हि २७) ९१।२६ | अव्यासुन्दरी (शा प ३३७७) २७०।९ | असत्सङ्गाद्दूषण (शा प ४/८९) ८७।७ |
| अवश्यंभाविभावाना ९१।२९ | अन्याद्रो वाम (सु ५९) २०।६० | असदधर्मस्त्वय ३४९।५२ |
| अवसरपठितं सर्वं (सु १५०) २९।१५ | अव्यापारेषु व्या (हि ० ३०) १६६।५६९ | असद्वृत्तो नाय (सु १६०७) ३०८।१३ |
| अवसरपठिता वाणी १७०।७५८ | अशक्त सतत १६६।५९३ | असमाप्ते समानत्वं (शा.प.स ३) १८१।३ |
| अवाप्त प्रा (का प्र १० ४३०) ३०४।१५८ | अशक्ता शक्ति (कविता. ७१) ५४।३२ | असमाप्तजि (सा द १०.५६) १५०।३५४ |
| अविकारिणमति (सु ४०९) ५८।१८३ | अशक्नुवन्सोढुम (सा द ३ २६६) ३६५।४ | अस्मै समी (पञ्च १ ८४) १५१।३७४ |
| अविज्ञातप्रब (किरात ११ ४२) १६१।३७४ | अशठमलोभ (शा प.प्र.८) १६९।७३१ | असहाय सहा (पञ्च १ १५२) ३६१।३ |
| अविज्ञातवि (सु १८८९) २९६।२ | अशन मे वसन ३७३।१९५ | असाधु साधु (शा प स १०) ५१।२३८ |
| अविदितगुणापि (शा प क.१) ३०।१६ | अशर्मदहनज्वल १२३।१९२ | असाध्यमन्यथा १४७।१९५ |
| अविदितपरमानन्दो १७०।७६७ | अशुचिर्वचनाद्यस्य १/२११० | असार एष ससार १५७।१८४ |
| अविदितसुखदुःख ३१९।३१ | अशुभमुषि कला १८९।/ | अमारभूते ससारे ३५०।३ |
| अविद्य पुरुष १६१।३८८ | अशृण्वन्नपि (पञ्च १ १७६) १६२।१६\ | अमारे खलु ससा (ध वि १०) ३६४।१२ |
| अविद्यं जीवन (चा.नी ४७) १६१।३८१ | अशेषसङ्गापतिसैन्यह २१।०६ | असारे खलु (विक्रम.१०५) १५६।१४६ |