सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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हमारे रहने का घर
बहुत कम खून की जरूरत होती है। पूरे आदमी की हड्डियाँ अगर सुखा ली जाँयें तो उनका वजन ४-५ सेर ही होता है।
दोनों दाँगें घर के खम्भे हैं। इनके तीन हिस्से हैं। ऊपर घुटनों तक जाँच है। दूसरा हिस्सा टखनों तक दांग है। तीसरा हिस्सा घर के खम्भे पाँव है। सारे घर में सबसे बड़ी हड्डी जाँच में है। उसके ऊपर का हिस्सा गोल है जो कूले के एक कटोरे में बैठ जाता है। नीचे वाला सिरा दांग की बड़ी हड्डी से सम्हाला जाता है। दांग में दो लम्बी हड्डियाँ हैं जिनमें आगे वाली पतली और पीछे वाली मोटी है। इनके सिवा एक घुटने की चूड़ी है जो छोटी-सी गोल हड्डी है। यही दांग के मुड़ने में मदद करती है। दोनों पाँवों में कुल ६० हड्डियाँ हैं, जो एक दूसरे से जुड़ी हैं। अगर पाँव में एक ही हड्डी होली तो न तो दांग मुड़ सकती, न हम उछल-कूद सकते।
घर के बीच का भाग एक बड़े भारी खम्भे पर उठा है जिसे हम रीढ़ की हड्डी कहते हैं। यह २४ छोटी-छोटी हड्डियों से बड़ा खम्भा जंगीर की तरह जुड़ी है और मुड़ सकती है। यह बीच में से खोखली होती है।
दोनों हाथ इस घर के पहरेदार हैं। और उसकी रखवाली करते हैं। वहाँ की हड्डियाँ लगभग दांगों की जैसी और वे इस कारीगरी से जोड़ी गई हैं कि आसानी से मुड़ सकती हैं तथा बोम्ब उठा सकती हैं।
खोपड़ी घर का गुम्मज है। उसमें घर की सबसे क़ीमती