भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 101, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 101

सुगम चिकित्सा

६०

१—चूना बिना बुभा हूआ और एक रीठे की भाँग घूटकर केले की पक्की फली के टुकड़े में रखकर दाहिने पहुँचे के नीचे जोड़ पर बीच की उँगली के सामने एक पहरतक मोटे कपड़े से बाँध रखो। बम बहो फसोला पड़ जायगा। उसे चाकू से न्योलकर पानी निकाल दो। निल्ली को आराम हो जायगा।

२—अजवाइन जितनी खा सके दोनों समय खाय।

३—सरसों का तेल निल्ली पर गुन-गुना मले।

४—मूली के बीज पीसकर निरके के साथ खाय।

५—अगर बुखार न हो तो ६ माशा मन्नी गुड़ में मिलाकर खाय।

जिसमें मरोड़ के साथ आँव थोड़ा-थोड़ा चार-चार निकलना है, कभी-कभी खून भी जाता है और मवाद पेशिश पड़ जाता है।

१—सोंठ, कालीमिर्च, बड़ी हरड का छिलका, तीनों चीजें बराबर लो, फिर तबे पर घी छोड़कर उन्हें अलग-अलग भून लो। भुन जाने पर उतना ही कालानमक मिलाकर कूटकर चूर्ण बना कर छः-छः माशा की पुड़िया बनाकर आध पाव दही के साथ मिलाकर खिलाओ। दिन में दो या तीन बार दही-भात भोजन दो। जल्द आराम होगा। प्यास लगने पर गर्म पानी पीना चाहिए।

२—सोंफ को घी में भूना, फिर कूट-छानकर बराबर कच्ची खाँड़ के साथ मिलाकर मादे मात माशा खाय, और ऊपर से ताजा पानी पीवे। तो खून पेशिश को फायदा करे।