सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 103, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम वाक्यस्य
६२
उल्टी और जी मिचलाना १—थोड़ा गेहूँ आग में लाल करके पानी में बुझाओ, वह पानी थोड़ा-थोड़ा पिलाने से उल्टी दूर होती है।
२—नीम की टहनी पत्तों सहित भूभल में दवा दो, गर्म होने पर पीस-छानकर पीने से जी मिचलाना और उल्टी आराम होती है।
३—इमली में रूखने से जी मिचलाना बन्द होता है।
४—अगर उल्टी में कफ निकलता हो तो यह करे कि एक चम्मच में घी गरम करो, उसमें दो बत्ताशे डाल दो, एक घड़ी के अन्तर से एक-एक बत्ताशा खाओ, तो कफ की उल्टी दूर हो।
एक माशा, हाँग एक तोला घी में गर्म करो। फिर एक मिट्टी का दीवला खूब लाल करके उसमें वह हाँग और घी डाल दो और उसे एक पाव दूध में दीवले समेत छोड़ दो। वह दूध पीने से शूल और अफारा दूर होगा।
२—नाभी में हाँग का फाया रखने से भी अफारा दूर होता है।
३—निसोत दो हिस्सा, पीपल चार हिस्सा, हरड्ड बड़ी पाँच हिस्सा, सबके बराबर गुड़, कूट-पीसकर चार आने-भर की गोली बनाकर गर्म पानी से सेवन करने से अफारा दूर होता है।
दिल के पास, पसलियों के नीचे, नाभि के नजदीक और मसाने में एक गाँठ पैदा होजाती है, उसे गोले वाय गोला की बीमारी कहते हैं। जब यह बीमारी पैदा होने को होती है तब भूख नहीं लगती, दस्त में कब्ज हो जाता है, पेट