सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 105, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ें: १४ :
बड़ी-बड़ी बीमारियाँ
ये बीमारियाँ बहुत मुश्किल से आराम होती हैं। इनका इलाज हमेशा अच्छे वैद्य या डाक्टरों से कराना चाहिए। फिर भी हम यहाँ उनके विषय में साधारण इलाज लिखते हैं।
गुदा के ठीक सँह पर या कुछ भीतर छोटी-छोटी गिल्टियाँ बन जाती हैं। ये गिल्टियाँ इस भाग की नसों के सिकुड़ने से पड़ जाती हैं। इसकी जड़ कब्ज है। इसलिए इस बवासीर रोग में सबसे पहला काम कब्ज को दूर करना है। बवासीर दो प्रकार की होती है, एक खूनी दूसरी वादी।
खूनी बवासीर में एकाएक रक्त को बन्द नहीं करना चाहिए। हाँ खून ज्यादा निकले और रोगी कमजोर होजाय तो बन्द कर देना चाहिए।
१—चूतड़ की हड्डी पर सींगी लगावे तो बवासीर को आराम हो।
२—एक बड़ी मूली लेकर खोखली कर लो और उसमें जितना ,