भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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बच्चों की बीमारियाँ

११. कान बहना—बालक के माँ के दूध की धार बच्चे के कान में डालो। या पठानी लोघ बारीक पीस कान में फूँक दो। सुदर्शन के पत्ते का रस टपकाओ।

१२. गला आजाना—शहतूत का शर्बत चटाओ।

१३. कोहे आजाना—उसे कहते हैं जिससे आँख की वाहरी कोर लाल पड़ जाती है। दुर्द होता है, खाज चलती है, घाव बढ़ता जाता है। इसका उपाय यह है कि कपड़े की पोटलों-सी बनाकर हाथ पर रगड़ो। अथवा मुँह की फूँक से गर्म करो, फिर आँख को सेको या काजल में सफैदा रगड़कर और डंगलियों में भरकर दिए की लौ पर डंगलियों को तनिक सेको तथा गर्म-गर्म ही आँख पर आँजलो।

१४. रोह—रोहों से आँख यदि बहुत सूज गई हो तो चाकसू उबाल कर छीलकर घिसकर आँख में आँजे। दिनमें दो-तीन बार।

१५. तालू पक जाना—या बैठ जाना। मुलतानी मिट्टी कई बार घिसकर दिन में कई बार तालुए पर रखलो।

१६. डुकास—इस रोग में बच्चा बार-बार पानी माँगता है। छुहारे की गुठली घिसकर पिलाओ।

१७. मुँह के छाले—सफेद हों और मुँह लाल होगा या हो तो पहले घुट्टी दे, फिर वंशलोचन पपरिया कल्या और छोटी इलाके बीज की बारीक बुरकी बनाकर बुरक दो।

१८—ज्वर बच्चों की सबसे भयानक बीमारी है, इसका इलाज किसी अच्छे डाक्टर-वैद्य से कराना चाहिए। क्योंकि ज्वर के