भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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सुगम वाक्य

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कभी-कभी आदमी पेट के बल पत्थर बगैरा पर गिर पड़े, तो अमाशय से खून की उल्टी होती है। यह खून काले रक्त का आता है। पर यदि लाल रक्त का आवे तो समझना खून की कय कि खून मुँह फेफड़े या गले से आया है। ऐसे आदमी को ठण्डा पानी या बरफ देना चाहिए।

पट्टी डेढ़ या ढाई इञ्च चौड़ी, पतली गजी की हो, जो धोबी की धुली हो पर जिनमें कलफ न हो। उन्हें आध घण्टे तक पानी में पकाकर सुखा लेना चाहिए, रुई भी बहुत साफ धुनी हुई हो। परन्तु कुसमय में रुमाल, धोती, तौलिया बगैरा से भी काम चल सकता है। पर हर हालत में पट्टी रंगीन न होनी चाहिए। पट्टी बाँधने की सब से सरल विधि-कपड़े को तिकोना करके सरलता से बाँध देना है। आवश्यकता होने पर इसके कई पत करके, लम्बी पट्टी के समान भी बाँधा जा सकता है।

सिर के धावों के लिए भी पट्टी, बड़े रुमाल व अंगोष्ठि से, दोनों किनारों के बीच थोड़ा फाड़ने से बना लेना चाहिए।

परन्तु गले में हाथ बाँधने के लिए या कुहनों में कूले, हाथ पैर आदि धावों के लिए इस तरह बाँधने की जरूरत नहीं, सिर्फ हाथ को एक रुमाल या अंगोष्ठि में लटकाना लेना चाहिए।

कम चौड़े स्थानों पर जैसे उँगलियों, हाथ-पाँव, जाँघ, धड़ आदि के लिए इन पट्टियों की जरूरत पड़ती है।

इन पट्टियों का बाँधना और लपेटना जरा मुश्किल है। पट्टियों

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