भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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चोट और अकस्मात

पहले से लपेटकर तैयार रखनी चाहिए, फिर उन्हें पिन या गॉठ बाँधकर रहने दो। पट्टी बाँधने से घाव के किनारे मिले रहते हैं, दवाव पड़ने से खून कम निकलता है, और मक्खी, थूल आदि से घाव सुरक्षित रहता है। (पट्टी बाँधने के अलग-अलग तरीकों के लिए सामने के पृष्ठ पर चित्र नं० ६ से १७ तक देखिए)।

छत से गिर जाने या पेड़ पर से गिर जाने पर हड्डी टूट जाय या जोड़ उखड़ जाय तो सावधान रहो जोड़ और हड्डियों में चोट और जोड़ बैठाने का काम अनाड़ी आदमी से न कराओ। बरना रोगी हमेशा के लिए अयोग्य हो जायगा।

मोच प्रायः टखने या कलाई में आती है। सन्धि के एकदम मुड़ जाने से उसको बाँधने वाली नसें थोड़ी खिंचकर फट जाती हैं।

मोच कभी-कभी वारीक नालियां और कभी जोड़ की थैली के फट जाने से मोच की जगह सूज जाती है। खून और सन्धि का पानी जमा हो जाने से ऐसा होता है। गॉठ पर दर्द होता है, पर जोड़ हिल सकता है। मोच आते ही जल्द-से-जल्द हृदय की ओर दवाकर मालिश शुरू कर दो। इस-पन्द्रह मिनट तक ऐसा करने से दर्द, संजुन कम हो जाती है। अगर दर्द बहुत ही ज्यादा हो तो ठण्डे पानी में कपड़ा भिगोकर जोड़ पर दवाकर लपेट दो।

जोड़ पर बहुत जोर पड़ने से जोड़ उखड़ जाता है। सबसे अधिक कन्धे के कूले के जोड़ हट जाया करते जोड़ हट जाना है। कभी-कभी जबड़े और कुहनी तथा घुटने के जोड़ भी उखड़ जाते हैं।