सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 153, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ेंसुगम चिकित्सा
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इलाज करो, बरना फजूल है। अक्सर इूवे हुए आदमी की नब्ज और साँस बन्द हो जाती है। इससे घबराओ मत, होशियारी से उसके आँखों की पुतली देखो। अगर तुम्हारी परछाई उसमें दीखे तो जीवित समझो बरना मृतक।
पहले मुंह और नथुनों को साफ करो। मुंह खोलो और जीभ को धीरे-धीरे आगे कोखोंको जिससे हवा भीतर जाय। गर्दन और छाती पर से कसा हुआ कपड़ा हटा दो।
रोगी को चित्त लिटाकर तकिया लगा दो, कि सिर और कन्धे उभर जाँय, फिर रोगी के हाथ कोहनी पर से पकड़कर यहाँ तक उठाओ कि सिर के ऊपर मिल जाय। दो सेकन्ड बाद पीछे वाहें नीचे झुका दो और पसलियें मिलाकर कंस कर दवाओ। एक घण्टे तक तथा जरूरत हो तो और देर तक करते रहो। एक मिनट में १५ बार यह कसरत कराओ, इससे रोगी का साँस चलने लगेगा।
इस तरकीब से साँस चलने लगे और दिल काम करने लगे; तो रोगी को रूई के गर्म फायों से या ऊनी कपड़े की गद्दी से या गर्म पानी की बोटलों से सेको। और गुनगने तेल की मालिश करो, तथा गर्म विछौने पर सुलादो। होश में आने पर गर्म दूध पीने को दो।
गर्मी में बहुत देर कड़ी धूप में काम करना या रास्ता चलने से अत्यन्त प्यास, ज्वर, बेहोशी, आँखें लाल, लू लगना भ्रम आदि होकर बीमार बेहोश हो जाता है।
इसीको लू लगना कहते हैं।