सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 155, कुल 222 में से
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अरहर की दाल पानी में भिगोकर पिलाओ। शराब का जशा चढ़ गया हो तो नीबू या इमली पानी में मिलाकर पिलाओ। पीतल के वर्तन में पितलाया हुआ पदार्थ खाने से जो जहर चढ़ गया हो तो मीठा तेल गर्म दूध में पिलाओ।
काटे हुए स्थान के दो अंगुल ऊपर तुरन्त कसकर डोरी से बांध दो, फिर जहाँ तक दोनों दांतों का घाव हो उसकी साँप काटना जड़ तक का मांस काट डालो। या लाल लोहे से जलादो। गर्म पानी डालते रहो जिससे खून बहना रुक जाय। अगर जहर शरीर में रम गया हो तो यह दवा दोः—
रीठा दो नग, नवसादर एक माशा, चौटेनी पाँच नग, एक तोला रेशम के कपड़े में पोटली बाँधो और कोयलों पर जला लो, जब धुआँ न रहे तब पोटली उठाकर ठण्डा कर तीन हिस्से करो; एक हिस्सा दवा दस तोला घी में मिलाकर रोगी को चटादो, कुछ घाव पर लगादो। दो-दो घण्टे बाद फिर दोनों खुराक देदो। फायदा होगा। साँप के काटे का शक हो तो नीम के पत्ते खिलाओ। मीठा लगे तो समझो साँप ने काटा है। मरीच को सोने मत दो। पास काँसी की थाली रख, जोर-जोर से बजाओ इससे खून में लहर पैदा न होगी। बीमार को दौड़ाओ। याद रखो साँप के काटे को सोने देना मौत को बुलाना है। साँप का काटा आदमी सोकर फिर नहीं उठता।
विच्छू—एक छटाँक पानी में एक छटाँक नमक पीसकर घोल दो। और काटे हुए स्थान पर बार-बार मलो।