भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 174

१५७

परिभाषा-सम्बन्धी खास-खास बातें

इयों चोगने गर्भ पानी में थोड़ी देर भिगो रखना और फिर ज्ञान कर काम में लेना ।

कच्ची या पक्की दवा पानी में पीस लेने से वह कनक कहाती है । कच्ची दवा कुचलकर रस निकालने को स्वरस कहते हैं । इन सब चीजों को पंचकपाय कहते हैं । किसी चीज का रस पुटपक करना हो तो, वह दवा कूटकर जामन या बड़ के पत्तों में लपेटकर उस पर मजबूत रस्सी से कस देना, फिर दो अँगुल मिट्टी का लेप कर देना, फिर सुखाकर आग में लाल कर लेना । पीछे भीतर की चीज को निचोड़ कर रस निकाल लेना चाहिए ।

चूर्ण बनाने की सबसे अच्छी तरकीब यह है कि सब दवाइयों अच्छी तरह अलग-अलग कूट-ज्ञान कर कपड़छान कर, फिर सबको मिलाकर इकट्ठा करले । अगर किसी चूर्ण की भावना देना हो तो उस रस की भावना देकर छाया में सुखाना और फिर काम में लेना ।

जिन दवाइयों की गोलियाँ बनानी हों उनका अच्छी तरह चूर्ण करके जिस रस में गोली बनानी हों, उस रस में, खरल कर भलीभाँति घोटना चाहिए । फिर जैसा विधान हो वैसी छोटी-बड़ी गोली बनाना । अगर गोली बनाने में किसी खास द्रव का उल्लेखन हो तो, पानी से गोली बनाना चाहिए । अगर गोली का परिमाण न लिखा हो तो एक रत्ती की गोली बनाना चाहिए । जिस रस की भावना देनी हो, वह रस दवा में डालकर, दिन को धूप और रात को ओस में रखना चाहिए ।