भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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सुगम आकाश

१०७

नमक,समुद्रनमक, मनिहारी नमक, कूट ये सब एक-एक तोला । इन्द्रायण की जड़ दो तोला,निसोथ तीन तोला,दन्ती तीन तोला,पीली थूहर चार तोला, सबको कूट-पीस कर चूर्ण बनाये । मात्रा चार माशा । इसे हृदय रोग, पाण्डुरोग, खाँसी,श्वास,भगंदर, मन्दाग्नि, ज्वर, कोद, संग्रहणी, में शराब के संग दे । पेट फूलने पर सिरके के साथ दे, गुलम रोग, उदर रोग, अजीर्ण आदि को उप- युक्त अनुपान से दे तो सब रोगों का प्रशमन करे ।

१० पंचसम चूर्ण—सौठ, हरड, पीपल, निसोथ, कालानमक, सब बराबर ले बारिक पीस चूर्ण करे । यह शूल, पेट का फूलना मन्दाग्नि, बवासीर, और आमवात को नष्ट करेगा ।

११ सितोपलादि—मिश्री सोलह तोला, वंशलोचन आठ तोला, पीपल चार तोला,छोटी इलायची के बीज दो तोला, दालचीनी एक तोला, सबको कूट-पीस कर घी और शहद के साथ सेवन करे, तो श्वास, खाँसी, क्षय, हाथ-पैरों का दाह, मन्दाग्नि, जीभ की शून्यता, पसली का दर्द, अरुचि, ज्वर, अर्द्धगत, रक्तपित्त सब दूर हो ।

१२ लवणमास्कर—पांचोनमक, धनिया, पीपल, पीपलामूल, कालाजीरा, पत्रज, नागकेशर, तालीस पत्र, और अमलवेत ये दस दवाइयां दो दो तोला । काली मिर्च, जीरा, सौठ एक-एक तोला । अनारदाना चार तोला,दारचीनी और इलायची छे-छे माशे । सबको कूट छान कर चूर्ण करे । इसे दही के पानी या दही की मलाई से अथवा छाछ या शराब के साथ चार माशा ले, तो उदर गोला,