सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 200, कुल 222 में से
संदर्भ में पढ़ें१८३
काम के शास्त्रीय नुसखे
पोकरमूल, कौवाडोंडी, मूगपर्णी, मापपर्णी, विद्यारीकन्द, साठ की जड़, कमल मेदा, महामेदा, छोटी इलायची, अगर, चन्दन, प्रत्येक चार-चार तोला । इन्हें थोड़ा कूटकर रखले । फिर बड़े-बड़े आँवले ५००, बड़े मटके में पोटली बाँध, डालकर उसमें १०२४ तोला पानी में दवा डालकर पकाओ । जब दवा का रस पानी में आजाय और आँवला गल जाय तब पोटली से आँवला निकालकर गुठली दूर करके कपड़े में रगड़ कर छान ले । फिर उसे २८ तोला मीठे तेल में बाद में उतने ही घी में भूने । जब पानी का अंश न रहे तब उतारे । अब काढ़े में तीन सेर खाँड़ डालकर चाशनी करे । जब दो तार की चाशनी होजाय तब उसमें उपरोक्त आँवला डाल कर पकावे । जब दीवले पड़ने लगे तब उतार ले । ठण्डा होने पर नीचे लिखी दवाइयाँ मिलादे । पीपल आठ तोला, वंशलोचन सोलह तोला, दारचीनी, इलायची, तेजपात नौ-नौ माशा । शहद चौबीस तोला । बस च्यवनप्राश तैयार है । क्षीण पुरुष को मोटा-ताजा बनाने में अपूर्व है । यह अबलेह बालक, वृद्ध, जख्मी, नपुंसक, शोपरोगी, हृद्दोगी, और स्वर क्षीण को लाभकारी है । खास, कास, प्यास, चातरक्त, उरोग्रह, वीर्य दोष, मूत्र दोष, सब को दूर करता है । इसके प्रयोग से बुद्धि स्मरण-शक्ति, रमण-शक्ति, शरीर कान्ति और वर्ण प्राप्त होता है । अजीर्ण का नाश होता है ।
२ मूसलीपाक—मूसली सफेद का चूर्ण बीस तोला । गाय का दूध चार सेर । दोनों को पकाकर मावा करे, फिर आध सेर ताजे घी में भूने । इसके बाद छेड़ सेर खाँड़ की चाशनी कर उसमें मिलादे ।