भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

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सुगम चिकित्सा

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बढ़ना कुछ कम होजाता है। दूसरे साल पौने तीन सेर तीसरे साल तीन सेर, इसीतरह सातवें साल तक प्रायः दो सेर ही बढ़ता है। आठवें से ग्यारहवें तक तीन सेर सालाना बढ़ता है, ग्यारहवें साल तक लड़के लड़कियों से अधिक बढ़ते हैं। पन्द्रहवें साल तक लड़कियाँ ज्यादा बढ़ती हैं। फिर उसके बाद लड़कों की बारी आती है।

जन्म के समय बच्चा आठ-नौ गिरह लम्बा होता है दो-तीन महीने तक लम्बाई जल्दी-जल्दी बढ़ती है। एक वर्ष पूरा होनेपर बच्चा साढ़े तीन गिरह बढ़ चुकता है और छठे साल जन्म से दूनी ऊँचाई हो जाती है। सात से तेरह वर्ष तक लड़के की ऊँचाई थोड़ी-थोड़ी बढ़ती जाती है। तेरह से सत्रह तक कद जल्दी-जल्दी बढ़ता है। इसके बाद फिर बढ़ना कम होजाता है। लड़कियाँ बारह-से-चौदह तक जल्दी-जल्दी बढ़ती हैं। बच्चों के क्रद में बढ़ने का खयाल अधिक नहीं रखना चाहिए। लम्बाई का खयाल रखना चाहिए; क्योंकि तौल में ही घटने-बढ़ने पर तन्दुरुस्ती की जाँच होती है। पुत्र १६७ पर दिये गये नकशे से इसका ठीक-ठीक ज्ञान होगा।

एक और बात ध्यान में रखनी चाहिए। अगर दूध छूटने पर बच्चा अन्न खाकर रहने लगे तो उसे चिकना-चुपड़ा मसालेदार खाना कभी न खिलावे; न मिठाई की बान लगावे।

दाँत निकलना—जिन दिनों बालकों को दाँत निकलते हैं उन दिनों उनकी लार बहुत निकलती है। इसलिए उसके गले में एक रुमाल वा अँगोछा बँधा रहना चाहिए। भीगने पर सूखा बदलना चाहिए और उसे धोकर सुखादे। इसी प्रकार हर घड़ी गले में सूखा कपड़ा