सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
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हाथ भी न जलेंगे। अब इस कपड़े को फेंले हुए कपड़े में लपेटकर जहाँ सेक करना हो वहाँ सेको। (देखो चित्र नं० १) ध्यान रखो कि चमड़ी जल न जाय। जितना ज्यादा पानी कपड़े में होगा उतना ही ज्यादा गरम मालूम होगा। रीढ़ पर, पेट पर, छाती पर या हाथ-पैरों के जोड़ों पर अक्सर सेकने की जरूरत पड़ जाती है। एक बार ५ मिनट तक सेककर कपड़ा फिर पानी में डाल दो और पाव घरुटे तक सेक रखो। तकलीफ़ ज्यादा हो तो आध घण्टे भी सेका जा सकता है। सेकने के बाद अङ्ग को गीला न रहने दो।
कमर के दर्द में तेल की मालिश करने और लेप करने की वनिस्वत सादा पानी से सेक करने से जल्द दर्द आराम हो जाता है, सूजन भी कम हो जाती है और खर्च भी कुछ नहीं होता। हर्ज भी कुछ नहीं। (देखो चित्र नं० २)
सिर दर्द होने पर या शुरू-शुरू बुखार में पेड़ की सूजन या बवाई फट जाने पर पैरों को सेकने से बहुत फायदा होता है। इसकी सीधी तरकीब है यह कि एक बड़ी बाल्टी में गर्म पानी भरकर पैर उसमें डालकर मूढ़े पर बैठ जाओ और यदि पसीना लाना हो तो कम्बल ओढ़ लो। (देखो चित्र नं० ३) यह काम बन्द मकान में करो। १५-२० मिनट पैर पानी में रखो, बीच-बीच में गरम पानी पीखो। अगर पानी में एक चम्मच पिस्ती राई डाल दी जायगी तो सेक खूब तेज़ होगी। पेशाब बन्द हो जाने पर, पेड़ की सूजन में, गर्भाशय की सूजन में, योनि या अण्डकोप