भारतकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 95, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 95

सुगम चिकित्सा

८४

पान में रखकर खाये। खट्टी बादी चीजों से परहेज करे तो सांस का आराम होवे।

६—थोड़े से गेहूँ कोरे शकोरे में रख, जलाकर राख करलो। फिर इनकी बराबर हल्दी को जालालो, दोनों को मिलाकर कूट लो। पहले दिन पाँच मांशे ठण्डे या गर्म पानी से लेवे। फिर रोज एक कौड़ी-भर बढ़ाता जाय, २१ दिन में आराम हो जायगा।

७—तमाखु की हरी पत्तियों का रस एक पाव निचोड़े, उसमें पाव-भर पुराना गुड़ डालकर आँटावे। जब शर्बत बन जाय, छान कर रखे। दो तोला पीवे। उल्टी, दस्त हो जाय तो थोड़ा पीवे। धीरे-धीरे बढ़ावे। इससे पांच-छै दिन में ही आराम हो जायगा।

इस बीमारी का सम्बन्ध पेट की खराबी से है। यह कई प्रकार की होती है। कभी-कभी तो इस रोग में मृत्यु हो जाती है।

इसकी उम्दा दवा यह है कि थोड़ी राई पानी में हिवकी पीसकर गिलास में घोल दो। जब राई नीचे बैठ जाय तो पानी धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा पीओ। चीनी और काली-मिर्च शहद में मिलाकर चाटो। अगर फिर भी बन्द न हो तो राई का पलस्तर पेट पर पांच-छै मिनिट रखो।

अगर बुखार खाँसी के साथ पसली में दर्द हो तो निमोनिया का आन्देशा है। अनेक प्रकार से इलाज कराना चाहिए। सर्दी और बादी का दर्द हो तो यह उपाय करो।

१—बारहसिंह का सींग पानी में घिसकर गुन-गुना कर पसली