भारतकोश
सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary

श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा

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104 सरब निरंतरि इको देखु ॥ कहु नानक जा कै मसतकि लेखु ॥७॥ इको जपि इको सालाहि ॥ इकु सिमरि इको मन आहि ॥ इकस के गुन गाउ अनन्त ॥ मनि तनि जापि इक भगवंत ॥ इको इकु इकु हरि आपि ॥ पूरन पूरि रहिआ प्रभु बिआपि ॥ अनिक बिसथार इक ते भए ॥ इकु अराधि पराछत गए ॥ मन तन अंतरि इकु प्रभु राता ॥ गुर प्रसादि नानक इकु जाता ॥८॥१६॥ सलोकु ॥ फिरत फिरत प्रभ आइआ परिआ तउ सरनाइ ॥