सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)
Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary
श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा
DevanagariHindipublished131 पृष्ठ
पृष्ठ 108, कुल 131 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 108
108 बिनु भगती तनु होसी छारु ॥ सरब कलिआण सूख निधि नामु ॥ बूडत जात पाइे बिस्रामु ॥ सगल दूख का होवत नासु ॥ नानक नामु जपहु गुनतासु ॥५॥ उपजी प्रीति प्रेम रसु चाउ ॥ मन तन अंतरि इिही सुआउ ॥ नेत्रहु पेखि दरसु सुखु होइि ॥ मनु बिगसै साध चरन धोइि ॥ भगत जना कै मनि तनि रंगु ॥ बिरला कोऊ पावै संगु ॥ इेक बसतु दीजै करि मइिआ ॥ गुर प्रसादि नामु जपि लइिआ ॥ ता की उपमा कही न जाइि ॥ नानक रहिआ सरब समाइि ॥६॥ प्रभ बखसंद दीन दइिआल ॥