सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)
Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary
श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा
DevanagariHindipublished131 पृष्ठ
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16 मन अपने ते बुरा मिटाना ॥ पेखै सगल सृसटि साजना ॥ सूख दूख जन सम दृसटेता ॥ नानक पाप पुन्न नही लेपा ॥६॥ निरधन कउ धनु तेरो नाउ ॥ निथावे कउ नाउ तेरा थाउ ॥ निमाने कउ प्रभ तेरो मानु ॥ सगल घटा कउ देवहु दानु ॥ करन करावनहार सुआमी ॥ सगल घटा के अंतरजामी ॥ अपनी गति मिति जानहु आपे ॥ आपन संगि आपि प्रभ राते ॥ तुम्री उसतति तुम ते होइ ॥ नानक अवरु न जानसि कोइ ॥७॥ सरब धरम महि स्रेसट धरमु ॥ हरि को नामु जपि निरमल करमु ॥