भारतकोश
सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary

श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा

DevanagariHindipublished131 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 131 में से

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64 जब धारै कोऊ बैरी मीतु ॥ तब लघु निहचलु नाही चीतु ॥ जब लघु मोह मगन संगि माइि ॥ तब लघु धरम राइि देइि सजाइि ॥ प्रभ किरपा ते बंधन तूटै ॥ गुर प्रसादि नानक हउ छूटै ॥४॥ सहस खटे लख कउ उठि धावै ॥ तृपति न आवै माइिआ पाछै पावै ॥ अनिक भोग बिखिआ के करै ॥ नह तृपतावै खपि खपि मरै ॥ बिना संतोख नही कोऊ राजै ॥ सुपन मनोरथ बृथे सभ काजै ॥ नाम रंगि सरब सुखु होइि ॥ बडभागी किसै परापति होइि ॥ करन करावन आपे आपि ॥ सदा सदा नानक हरि जापि ॥५॥

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