भारतकोश
सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary

श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा

DevanagariHindipublished131 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 131 में से

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83 नानक सो जनु सचि समाता ॥८॥१५॥ सलोकु ॥ रूपु न रेख न रंगु किछु तृहु गुण ते प्रभ भिन्न ॥ तिसहि बुझाइ नानका जिसु होवै सुप्रसन्न ॥१॥ असटपदी ॥ अबिनासी प्रभु मन महि राखु ॥ मानुख की तू प्रीति तिआगु ॥ तिस ते परै नाही किछु कोइ ॥ सरब निरंतरि इेको सोइ ॥ आपे बीना आपे दाना ॥ गहिर गंभीरु गहीरु सुजाना ॥ पारब्रहम परमेसुर गोबिंद ॥ कृपा निधान दइिआल बखसंद ॥ साध तेरे की चरनी पाउ ॥

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