भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

पृष्ठ 137, कुल 284 में से

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पृष्ठ 137

१२८ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ सुन्दर कहत ऐसो साधु कोऊ शूरबीर, ताकि ताकि सबहि पिगुन दल मार्यौ है ॥१०॥ मारे काम क्रोध जिन, लोभ मोह पीसि डारे, इन्द्रिय कतल करि कीयौ रजपूतौ है । मार्यौ मदमत्त मन, मार्यौ अहंकार मीर, मारे मद मछर ऊ ऐसौ रन रूतौ है ॥ मारि आशा तृष्णा जिन पापनी सापनी दोऊ, सबकौ प्रहारि निज पद ई पहूतौ है । सुन्दर कहत ऐसैं साधु कोऊ शूरवीर, वैरी सब मारि कैं निश्चित होई सूतौ है ॥११॥ कियौ जिन मन हाथ इन्द्रिनि कौ सब साथ, घेरि घेरि आपने ई नाथ सौं लगाये हैं । और हू अनेक वैरी मारे सब युद्ध करि, काम क्रोध लोभ मोह खोदिकै बहाये हैं ॥ किये हैं संग्राम जिन दिये हैं भगाइ दल, ऐसैं महा सुभट सुग्रन्थनि मैं गाये हैं । सुन्दर कहत और शूर याँ ही खपि गये, साधू शूरवीर वै ई जगत मैं आये हैं ॥१२॥

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