भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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पृष्ठ 159

१५० ] ॥ सुन्दर विलास ॥ देव माहि तैं देवल प्रगट्यौ, देवल मैं तैं प्रगट्यौ देव । सिष गुरु ही उपदेशन लागौ, राजा करै रंक की सेब ॥ बंध्या पुत्र पंगु एक जायौ, ताकौ घर खोवन की टेव । सुन्दर कहै सु पण्डित ज्ञाता, जो कोऊ याकौ जानै भेव ॥१६॥ कमल मांहि तैं पानी उपज्‍यौ, पानी मंहि तै उपज्यौ सूर । सूर मांहि शीतलता उपजी, शीतलता में सुख भरपूर ॥ ता सुख को क्षय होइ न कबहू, सदा एकरस निकट न दूर । सुन्दर कहै सत्य यह यौ ही, यामैँ रती न जानहु कूर ॥१७॥ हंस चढ्यौ ब्रह्मा के ऊपर, गरुड चढ्यौ पुनि हरि की पीठि । बैल चढ्यौ है शिव के ऊपर, सो हम देख्यौ अपनी दीठि ॥ देव चढ्यौ पाती के ऊपर, जरख चढ्यौ डाषनि परि नीठि ।