सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)
Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary
सन्त सुन्दरदास जी द्वारा
DevanagariHindipublished284 पृष्ठ
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१५२ ] ॥ सुन्दर विलास ॥ पुरुष एक पांनी महि प्रगट्यौ, ता निगुरा की कैसी जाति । सुन्दर सोई लहै अर्थ को, जो नित करै पराई ताति ॥११॥ उनयौ मेघ घटा चहु दिस तें, बर्षन लग्यौ अखंडित धार । बूड्यौ मेर नदी सब सूकी, झर लाग्यौ निस दिन इकसार ॥ कांसा पर्यौ बीजली ऊपरि, कीयौ सब कुटुम्ब संहार । सुन्दर अर्थ अनूपम याकौ, पण्डित होइ सु करै बिचार ॥१२॥ बाडी मा हैं माली निपज्यौ, हाली मा हैं निपज्यौ खेत । हंस हि उलटि श्याम रंग लागौ, भ्रमर उलटि करि हूवो सेत ॥ ससिहर उलटि राहु की ग्रास्यौ, सूर उलटि करि ग्रास्यौ केत । सुन्दर सगुरा कौं तजि भाग्यौ, निगुग सेती बाध्यौ हेत ॥१३॥