भारतकोश
संग्रह पर लौटें

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

२७४ काम क्रोध लोभादि । राजा-राम, परमात्मा । धनुष-ध्यान या रामनाम । कमर-हृदय । तरकस-बाण, विचार । सावज- शिकार, मन । जुहार-निवेदन, अर्पण । (३०) शुक-ज्ञानी गुरुदेव । कोकिल-कोयल, विचार- वान पुरुष । सारस-अविवेकी व्यक्ति । हंस-विवेकी जन । मुक्ताफल-गूढ, सार अर्थ । मानसरोवर-हृदय । न्हाहि-प्रसन्न होते है । करक-दोष । (३१) द्विज-ब्राह्मण, जीव । भ्रष्टक्रिया-सांसारिक भोगविलास । ठोर-परमपद, परमानन्द ।

प्रदान की गई छवि पूरी तरह से रिक्त (blank/white) है, इसमें कोई पाठ (text) दिखाई नहीं दे रहा है। कृपया सही या स्पष्ट छवि पुनः अपलोड करें।