सूरसागर सार (सटीक हिन्दी व्याख्या)
Sur Sagar Saar with Hindi Commentary
महाकवि सूरदास / डॉ. धीरेन्द्र वर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविषय-सूची विनय तथा भक्ति १७ मंगलाचरण १७, सगुणोपासना १७, भक्त-वत्सलता १८, अविद्या माया २२, गुरु महिमा २३, नाम महिमा २४, विनती २५, भगवदाश्रय २६, भावी ३१, वैराग्य ३३, मन प्रबोध ३६, चित्तबुद्धि-संवाद ४१, हरिविमुख- निन्दा ४२, सत्संग महिमा ४३, स्थितप्रज्ञ ४३, आत्मज्ञान ४४। गोकुल-लीला ४७ कृष्ण जन्म ४७, शैशवचरित ५०, वालगोपाल ५५, माखन-चोरी ६५। वृन्दावन-लीला ८० वृन्दावन प्रस्थान ८०, गोदोहन ८०, गो-चारण ८०, काली दमन ८७, मुरली ९४, कमरी १००, चीर-हरन १०१, गोवर्द्धन धारण १०४, रासलीला ११०, पनघट लीला १२०, दमन लीला १२३, गोपिका अनु- राग १३३, रूप वर्णन १३६, नेत्र अनुराग १४१। राधा-कृष्ण १४६ प्रथम मिलन १४६, गाढ़ी कृष्ण १५०, सम्बन्ध रहस्य १५३, राधा सखी संवाद १५६, माता की सीख १६०, कृष्ण दर्शन १६१, राधा का अनुराग १६४, उपहास १७१, सहसा भेट १७२, व्याज मिलन १७६, भ्रम १८१, एकनिष्ठा १८२, लघुमान लीला १८४, कृष्ण-गोपिका १८६, मानलीला १९३, खंडिता प्रकरण १९६, मध्यम मान १९८, बड़ी मान- लीला २०३, वसंतोत्सव २०७। मथुरा गमन २११ अक्रूर ब्रज आगमन २११, मथुरा प्रयाण २१४, मथुरा प्रवेश तथा कंस वध २१६, नन्द का ब्रज प्रत्यागमन २२५, गोपी-वचन तथा ब्रजदशा २३०, गोपी विरह २३६। उद्धव संदेश २६० उद्धव को ब्रज भेजना २६०, तीन पाती तथा संदेश २६५, उद्धव ब्रज आगमन २६६, उद्धव का गोपियों को पाती देना २७४, भ्रमरगीत २७८,