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स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

(३३)

लाभ होई। राजा प्रजा सनमान करै और की नहरू जगार करै तो फतै होई और गरीब साधे तो गरीबी मिटि जाइ। तन से मन से धन से आनन्द से रहे। हमेश और सतगुरु मिले तो फल पावै और तीन देवता सुर के रखवारे है। ज करै। फौज लड़े तो जीतै। स्त्री से संगति करै, घोड़े हाथी पर सवारी करै, पोशाक करै, पूजा करै, भोजन करै, पराये घर जाई। इतने चर कारज उलाइते दाहिने सुर में कीजै।

शनीचर, रविवार, मंगल ये दिन दाहिने स्वर के हैं। इन के उदैं में डेरा स्वर चलै तो असुभ जानिये। कछू कारज न करै और जब लौ डैरो सुर चले तब लौ काहूँ सौ न बोले और दोनों सुर बराबर चलते होई और शनीचर का दिन होई। आकास तत्व होई और पहर भर चलै सनीचर में उदय में तो जीवन मुक्ति होई।

पाँच पहर में देवलोक होई और बचाय चाहे तो प्यास लगे तो पानी न देई। अन्न न दे। भूख लगै तौ दूध देई पीव को और कछू न देई। तो सुर फिर जाई। मरै नहीं काल हुमसि जाई। सुख पावै। और इतवार दिन होई, पृथ्वी तत्व होई चारि पहर एक सौ चलै। दाहिने सुर में तो बड़ो फल होई। मरै तो दोऊ जनम की खबर कहै कौनहू जोन में जनम लेई।

और सोमवार के दिना चन्द्र सूर सोलह पहर चलै रात दिन तो जानिये के बड़ी आनन्द हुई है। और कदाचित मरै तो ब्राह्मण होई तो जल दाग देई तौ नौ नाथ के हर बारे जाई। तीन आसमान को खबरें कहे। सब देवतन को दरबार करै।

जलतत्तु के गुण—मंगल के उदैं में अग्नि तत्तु बहे चारि पैहर। तो देही को कछू कष्ट उपजै। बचाये चाहे तो कछू उपाई करै। दोऊ सुरन में ठैंठा देई, मुख होकैं स्वाँस कढ़नन न दै। नाक होई न कढ़न देई, अन्न पानी कछू न देई। तौ कष्ट छूटै सुख पावै।

और बुध के उदय में पृथ्वी तत्त चलै चार पहर तौ जानियो कि मनसा पूर्ण होई है और बृहस्पति के उदय तो सरदी को नास होई। जन सुख पावै

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